रांची : पलामू के दीदरी गांव से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक का प्रेरणादायी सफर थम गया। देश के वरिष्ठ वन सेवा अधिकारी एवं सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट चंद्रदेव पांडेय का निधन हो गया। वे 92 वर्ष के थे।
उनका जन्म 22 अगस्त 1934 को पलामू जिले में लेस्लीगंज के माधव दीदरी में हुआ था। उनके निधन से न केवल पलामू जिला, बल्कि राज्य और देश ने एक ऐसे प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व को खो दिया है, जिन्होंने अपने जीवन में संघर्ष, सफलता और सेवा की एक मिसाल कायम की।
अत्यंत साधारण ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से विपन्न परिवार में जन्मे श्री पांडेय ने अपने अदम्य साहस, अथक परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर सफलता की वह ऊँचाई प्राप्त की, जो असंख्य युवाओं के लिए आज भी प्रेरणा है।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के लेस्लीगंज प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की और विद्यालय, महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सर्वाधिक अंक अर्जित किया।
सीमित संसाधनों, सामाजिक दबावों और कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा और सेवा को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। कम उम्र में विवाह एवं पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उनका आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण कभी डगमगाया नहीं।
उन्होंने देश की सर्वोच्च प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय वन सेवा में चयन प्राप्त किया और मात्र 27–28 वर्ष की आयु में यह उपलब्धि हासिल कर एक मिसाल स्थापित की। उनका प्रशासनिक सफर प्रभागीय वन अधिकारी, गुमला से प्रारंभ होकर भारत सरकार के प्रतिष्ठित पद इंस्पेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट भारत सरकार तक पहुंचा।
अपने कार्यकाल में उन्होंने वन विभाग में झारखंड राज्य वन विकास निगम लिमिटेड की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने देश-विदेश में, विशेषकर नाइजीरिया साउथ अफ्रीका, जर्मनी, टोक्यो ब्राजील जैसे देशों में चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट में भारत की ओर से अपनी सेवाएं देकर भारत का नाम गौरवान्वित किया।
चंद्रदेव पांडेय न केवल एक कुशल और ईमानदार प्रशासक थे, बल्कि एक संवेदनशील, सादगीपूर्ण एवं मार्गदर्शक व्यक्तित्व भी थे। उन्होंने सदैव जरूरतमंदों की सहायता की और अपने अनुभवों से समाज एवं युवाओं को सही दिशा देने का कार्य किया। उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय शांति देवी जी का पूर्व में ही निधन हो चुका है, जिनके संस्कार और स्नेह आज भी परिवार में जीवंत हैं।
उनके परिवार में उनके दो पुत्र एवं दो पुत्रियाँ हैं, जो उनकी विचारधारा और मूल्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके ज्येष्ठ पुत्र अरविंद पांडेय यूरोप स्थित एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में निदेशक के पद पर कार्यरत रहे और गत वर्ष सेवानिवृत्त हुए।
उनके छोटे पुत्र अरुण पांडेय झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग में मुख्य अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए। उनकी छोटी बहू ज्योति पांडेय रांची विश्वविद्यालय अंतर्गत निर्मला कॉलेज, रांची में अर्थशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष हैं।
उनकी दो पुत्रियां किरण पांडेय एवं रश्मि चतुर्वेदी अपने-अपने क्षेत्रों में प्रतिष्ठित हैं। उनकी छोटी पुत्री एवं उनके दामाद संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उनकी पौत्री मुंबई में चिकित्सक के रूप में सेवा दे रही हैं।
चंद्रदेव पांडेय का संपूर्ण जीवन इस सत्य का जीवंत उदाहरण है कि यदि इरादे मजबूत हों और परिश्रम सच्चा हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उनका निधन समाज, प्रशासन और आने वाली पीढ़ियों के लिए अपूरणीय क्षति है।
