
महेश सिन्हा

सीट शेयरिंग पर अंतिम निर्णय तक सभी सीटों पर उम्मीदवारों की तलाश रखेगी जारी

पटना : बिहार विधान सभा चुनाव की घोषणा अक्टूबर के पहले सप्ताह में किए जाने की संभावना है। इस चुनाव को लेकर सरगर्मी अब तेज हो गई है। हालांकि,दोनों प्रमुख गठबंधनों एनडीए और महागठबंधन ने अभी तक सहयोगी दलों के बीच सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप नहीं दिया है।
इसको लेकर दोनों में बातचीत का दौर जारी है। इस बीच एनडीए के सभी घटक दलों ने यह साफ कर दिया है कि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और वही फिर सीएम होंगे। लेकिन महागठबंधन में सीएम फेस को लेकर अभी भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस ने तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा बनाने पर एक बार फिर ना कह दिया है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने अपने ताजा बयान में दो टूक कहा है कि बिहार की जनता तय करेगी सीएम का चेहरा। इससे पहले वोटर अधिकार यात्रा के दौरान राहुल गांधी भी तेजस्वी यादव को सीएम फेस मानने से बचते दिखे थे। दरअसल कांग्रेस दुविधा में है। वह तेजस्वी का नेतृत्व स्वीकारने में संकोच कर रही है। क्योकि ऐसा करने से उसे राजद का पिछलग्गू ही समझा जायेगा।
जबकि वह अब बिहार में अपनी इस छवि से बाहर निकलना चाहती है।राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस के इस रुख को सीट शेयरिंग में कमजोर नहीं पड़ने की कवायद के रूप में भी देख रहे हैं। यही वजह है कि कांग्रेस ने अजय माकन की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई बिहार की स्क्रीनिंग कमेटी में नई रणनीति बनाई है।
इसके तहत कांग्रेस महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों के बंटवारे पर अंतिम निर्णय होने तक राज्य की सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार की तलाश जारी रखेगी।मालूम हो कि कांग्रेस को 70 से कम सीट मंजूर नहीं है। कांग्रेस इस बार ज्यादा कमजोर सीट लेने के मूड में भी नहीं है। इसलिए वह राजद पर दवाब बना रही है। उसके लिए इस बार के विधान सभा चुनाव में खुद को राजद के पिछलग्गू की छवि से बाहर निकाल कर सूबे की बड़ी सियासी ताकत के तौर पर पेश करने की है।
लेखक न्यूजवाणी बिहार के संपादक हैं।


