विश्व हेपेटाइटिस दिवस हर साल 28 जुलाई को नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक सैमुअल ब्लमबर्ग की जयंती के सम्मान में मनाया जाता है। उन्होंने हेपेटाइटिस-बी वायरस की खोज की और इसके परीक्षण व टीके के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य हेपेटाइटिस के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और लोगों को समय पर जांच व इलाज के लिए प्रेरित करना है।
हेपेटाइटिस से लड़ाई के चार महत्वपूर्ण कदम
विशेषज्ञों के अनुसार हेपेटाइटिस को नियंत्रित करने के लिए चार प्रमुख कदम बेहद जरूरी हैं—रोकथाम, निदान, परामर्श और उपचार। इन चारों चरणों पर प्रभावी ढंग से काम करके संक्रमण के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है और मरीजों को बेहतर जीवन दिया जा सकता है।
रोकथाम और समय पर जांच क्यों है जरूरी?
हेपेटाइटिस ए और बी से बचाव के लिए प्रभावी टीके उपलब्ध हैं, इसलिए समय पर टीकाकरण बेहद आवश्यक है। साथ ही लोगों को वायरस के फैलने के तरीकों और इससे होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है। हेपेटाइटिस बी और सी की पहचान साधारण रक्त जांच से की जा सकती है। चूंकि कई संक्रमित लोगों में शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए जोखिम वाले लोगों को नियमित जांच करानी चाहिए।
उपचार और परामर्श से बढ़ती है स्वस्थ जीवन की संभावना
हेपेटाइटिस ए और ई के अधिकांश मामलों में विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं होती, जबकि हेपेटाइटिस बी के मरीजों का उपचार विशेषज्ञ डॉक्टर (हेपेटोलॉजिस्ट) की निगरानी में किया जाता है। वहीं, आधुनिक एंटीवायरल दवाओं की मदद से हेपेटाइटिस सी का इलाज 95–99 प्रतिशत तक सफल माना जाता है। समय पर परामर्श, सही उपचार और नियमित फॉलो-अप से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।
