हर वर्ष 1 जुलाई को भारत में जीएसटी दिवस (GST Day) मनाया जाता है। यह दिन देश की सबसे बड़ी कर सुधार व्यवस्था गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) को समर्पित है। वर्ष 2026 में भारत GST लागू होने की 9वीं वर्षगांठ मनाएगा। यह दिवस कार्यदिवस होने के बावजूद कर सुधारों और आर्थिक विकास में जीएसटी के योगदान को याद करने का अवसर प्रदान करता है।
बिहार की CAG रिपोर्ट में क्या सामने आया?
जीएसटी दिवस के अवसर पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की हालिया रिपोर्ट ने बिहार के राजस्व संग्रह की सकारात्मक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, GST लागू होने से पहले बिहार का स्व-राजस्व औसतन 6.63% की दर से बढ़ रहा था, जबकि GST लागू होने के बाद यह वृद्धि बढ़कर 10.83% हो गई। हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि अधिकांश वर्षों में राज्य जीएसटी (SGST) संग्रह बजट अनुमान से कम रहा, जिससे राजस्व प्रबंधन को और मजबूत करने की आवश्यकता बनी हुई है।
जीएसटी का इतिहास
भारत में जीएसटी का विचार पहली बार वर्ष 2000 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान सामने आया। इसके लिए एक समिति का गठन किया गया, जिसने देश में एक समान कर प्रणाली का प्रारूप तैयार किया। कई वर्षों की चर्चा और विभिन्न सरकारों के प्रयासों के बाद संविधान (101वाँ संशोधन) अधिनियम, 2016 पारित हुआ। इसके बाद 1 जुलाई 2017 को पूरे देश में जीएसटी लागू किया गया, जिसने केंद्र और राज्य सरकारों के कई अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ की अवधारणा को साकार किया।
आर्थिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
जीएसटी ने भारत की कर व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और एकीकृत बनाया है। इससे कारोबार करने में आसानी बढ़ी है और राज्यों के राजस्व संग्रह में भी सुधार देखने को मिला है। GST Day हमें इस ऐतिहासिक कर सुधार के महत्व को समझने और देश की आर्थिक प्रगति में इसकी भूमिका को याद करने का अवसर देता है।
