कहा जाता है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। इस बात को सच कर दिखाया है 46 वर्षीय हरी बुद्धा मगर ने। दोनों पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने जिंदगी के सामने हार मानने के बजाय अपने सपनों को नई उड़ान दी और दुनिया के लिए प्रेरणा बन गए।
बम धमाके ने बदली जिंदगी
नेपाल के एक साधारण परिवार में जन्मे हरी बुद्धा मगर का बचपन पहाड़ों के बीच बीता। बाद में उन्होंने ब्रिटिश सेना की प्रसिद्ध गोरखा रेजिमेंट में शामिल होकर देश सेवा का रास्ता चुना। लेकिन साल 2010 में अफगानिस्तान में तैनाती के दौरान आईईडी ब्लास्ट में उनके दोनों पैर घुटनों के ऊपर से काटने पड़े।
यह घटना किसी के लिए भी जिंदगी बदल देने वाली हो सकती थी, लेकिन हरी ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
एवरेस्ट से सेवन समिट्स तक का सफर
व्हीलचेयर से जिंदगी की नई शुरुआत करने वाले हरी ने अपने बचपन के सपने माउंट एवरेस्ट को फतह करने का संकल्प लिया। उन्होंने कृत्रिम पैरों की मदद से कठिन पर्वतारोहण प्रशिक्षण शुरू किया।
मई 2023 में उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर दुनिया को चौंका दिया। इसके बाद जनवरी 2026 में अंटार्कटिका के माउंट विंसन को फतह कर उन्होंने सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों यानी “सेवन समिट्स” मिशन को पूरा कर इतिहास रच दिया।
प्रेरणा की मिसाल
आज हरी बुद्धा मगर के नाम पांच गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि असली ताकत शरीर में नहीं, बल्कि हौसलों में होती है।
