मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुश नगर निवासी 74 वर्षीय रामनरेश आज भी अपनी फिटनेस और ताकत से युवाओं को हैरान कर देते हैं। कभी पहलवान रहे रामनरेश का कहना है कि उनकी देसी जीवनशैली ही उनकी अच्छी सेहत का सबसे बड़ा कारण है। शहर में रहने के बावजूद वे कभी पंखे या कूलर की हवा में सोना पसंद नहीं करते। उनका दावा है कि आज भी उनके शरीर में इतनी ताकत है कि कई युवा उनके सामने टिक नहीं पाते।
दिनभर में 20 से 25 रोटियां और भरपूर पौष्टिक आहार
रामनरेश बताते हैं कि वे एक समय में 12 रोटियां तक खा लेते हैं और करीब एक किलो दूध पी जाते हैं। इसके अलावा 100 से 200 ग्राम घी का सेवन भी करते हैं। पूरे दिन में वे 20 से 25 रोटियां खा लेते हैं। काजू, बादाम और अन्य मेवे भी उनकी डाइट का हिस्सा हैं। उनका मानना है कि नियमित पहलवानी के अभ्यास और शारीरिक मेहनत की वजह से उनका शरीर इस भोजन को आसानी से पचा लेता है।
कभी पीते थे 7 लीटर दूध
पहलवानी के दिनों में रामनरेश रोजाना 7 लीटर दूध पीते थे और साथ में काजू, बादाम व किशमिश का सेवन करते थे। उम्र बढ़ने के साथ इन चीजों की मात्रा कम हुई है, लेकिन आज भी वे दूध, घी और मेवों का नियमित सेवन करते हैं। उन्होंने जीवनभर मांस और शराब से दूरी बनाए रखी है।
बीमारी से दूर और खुली हवा में आराम
रामनरेश का कहना है कि उन्हें कभी कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई। साल में कभी-कभार सर्दी-जुकाम हो जाता है, जो बिना दवा के ठीक हो जाता है। वे सुबह 5 बजे उठकर अपनी भैंसों की देखभाल करते हैं और दिन में किराना दुकान चलाते हैं। उन्हें खुली हवा में सोना पसंद है और पंखे-कूलर की हवा से शरीर में दर्द महसूस होता है। गर्मियों में वे घर के बाहर चारपाई पर सोना ही बेहतर मानते हैं।
