
इस पर सियासत भी तेज हो गई है

पटना : बिहार की राजधानी पटना के मुन्नाचक स्थित ‘शंभू गर्ल्स हॉस्टल’ में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस हाई-प्रोफाइल केस की गुत्थी सुलझाने के लिए गठित विशेष जांच दल (एस आईटी) रविवार को काफी सक्रिय रहा। उधर इसको लेकर राजनीति भी गरमाने लगी है ।

पुलिस का दावा है कि कई तरह के साक्ष्य मिले हैं और कई साक्ष्य और आने हैं। एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एसआईटी की टीम सुबह सुबह डॉ. सहजानंद की क्लिनिक में पहुंची, जहां टीम ने डॉक्टर से पूछताछ की। इसके बाद टीम राजेंद्र नगर स्थित डॉ. प्रभात मेमोरियल अस्पताल पहुंची, जहां छात्रा का इलाज किया गया था। टीम ने अस्पताल में इलाज से जुड़े रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों से पूछताछ की।
जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि छात्रा की तबीयत बिगड़ने की वजह क्या थी और इलाज के दौरान किसी तरह की लापरवाही तो नहीं बरती गई? पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में कई एंगल से जांच की जा रही है और अलग-अलग थ्योरी पर एसआईटी काम कर रही है। हॉस्टल प्रबंधन की भूमिका, छात्रा की गतिविधियां और इलाज से जुड़ी परिस्थितियों की भी गहन पड़ताल की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर साफ तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल एसआईटी हर पहलू को ध्यान में रखते हुए सबूत जुटाने में लगी हुई है। छात्रा की मेडिकल हिस्ट्री को खंगाला जा रहा है। इलाज से जुड़े हर बिंदु की जांच हो रही है। इस मामले पर एएसपी अभिनव से पत्रकारों ने सवाल किया कि आपने जल्दबाजी में क्यों बयान दिया। इतनी जल्दी क्या थी? इस पर उन्होंने कुछ नहीं बोला। वे मीडिया से बचते नजर आए। अपनी गाड़ी छोड़ एसडीपीओ डॉक्टर अन्नू की गाड़ी में बैठकर निकल गए। एसआईटी में एएसपी सदर अभिनव, एसडीपीइ सचिवालय-1, डॉक्टर अन्नू समेत कई अधिकारी शामिल हैं।
अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से अलग-अलग सवाल पूछकर यह जानने की कोशिश हो रही है कि इलाज के दौरान क्या-क्या किया गया और किन परिस्थितियों में छात्रा की मौत हुई? एसआईटी की टीम सहज सर्जरी नर्सिंग होम के डॉक्टरों और काउंटर पर मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ की। यह अस्पताल डॉक्टर सहजानंद प्रसाद सिंह का है, जो आईएमए के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बताया जाता है कि छात्रा का पहला इलाज इसी अस्पताल में हुआ था। बाद में उसकी हालत बिगड़ने पर उसे प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल रेफर किया गया।
उधर, जांच के साथ-साथ इस मामले में सियासत भी तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार और पुलिस पर सवाल उठा रहा है। छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले में पप्पू यादव ने सीबीआई जांच की मांग की है। इसे लेकर उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। पप्पू यादव से पहले वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की थी। वहीं, इस मामले में उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि कोई अपराधी नहीं बचेगा। उच्च स्तरीय टीम जांच कर रही है।
डीजीपी खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। तकनीकी साक्ष्य और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की राय अब उस अंतिम नतीजे पर पहुंच गई है जहां यह साफ हो जाएगा कि उस रात शंभू गर्ल्स हॉस्टल में असली गुनाहगार कौन था? वहीं, मंत्री दिलीप जायसवाल ने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि विपक्ष छात्रा की मौत पर राजनीतिक रोटी नहीं सेंक। मीडियाकर्मियों से बातचीत में उन्होंने कहा कि छात्रा की मौत पर कुछ नेता या विपक्ष के लोग राजनीतिक रोटी सेंकने का काम कर रहे हैं, इससे बाज आएं। इस तरह की घटना में राजनीतिक रोटी नहीं सेंके।
दिलीप जायसवाल ने साफ तौर पर कह दिया है कि जो कोई भी दोषी होगा वो कानून की पकड़ से बाहर नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी तरह की लापरवाही बरती नहीं जाएगी।
उधर, रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि नीट की छात्रा दरिंदगी की शिकार हुई, उसे इंसाफ कब मिलेगा? उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का है। वहीं, पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव भी शनिवार देर रात प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचे थे। वहां उन्होंने डॉक्टरों से बातचीत के बाद बाहर निकलकर बड़ा आरोप लगाया। पप्पू यादव ने कहा कि आरोपी मनीष रंजन देह व्यापार का रैकेट चलाता है। वह नेताओं और सफेदपोशों को लड़कियां सप्लाई करता है।
उन्होंने दावा किया कि इलाज के दौरान छात्रा होश में आई थी। इसके बावजूद उसे जबरन वेंटिलेटर पर डाल दिया गया। परिवार के सदस्यों को मनीष रंजन के गार्ड ने उलझाकर रखा। आरोपी को बचाने की कोशिश की जा रही है। पप्पू यादव ने पुलिस पर भी लापरवाही का आरोप लगाया और सीबीआई जांच की मांग दोहराई।इसी बीच आज हॉस्टल के बाहर बड़ी संख्या में छात्राएं और उनके परिजन जमा हो गए। छात्राओं ने आरोप लगाया कि उनके सामान को हॉस्टल में बंद रखा गया है और उन्हें वापस नहीं दिया जा रहा है। इस बात को लेकर छात्राएं और परिजन लगातार हंगामा किया। मौके पर मौजूद परिजनों ने भी जबर्दस्त हंगामा किया।
छात्राओं का कहना है कि उनका 2 फरवरी से परीक्षा है और उनके सभी किताब, नोट्स यहां तक की लेबटॉप भी हॉस्टल के कमरे में बंद है। ऐसे में उनको परीक्षा की तैयारी करने में दिक्कत हो रही है। छात्राओं का कहना है कि उनको उनका सारा सामान वापस दिया जाए। वहीं परिजनों का कहना है कि वो अपनी बेटी को अनपढ़ रख लेंगे, लेकिन ऐसे जगहों पर पढ़ाई के लिए नहीं भेजेंगे। परिजनों का कहना है कि अब उन्हें पटना के किसी भी हॉस्टल पर भरोसा नहीं है। हालांकि, हॉस्टल पहुंची लड़कियों ने मृतका को पहचाने से इनकार कर दिया।
परिजनों का साफ कहना है कि वो अपनी बेटी को पटना में नहीं रखेंगे। बिहार के अलग अलग जिलों से छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ पहुंची थीं। इस दौरान मौके पर पुलिस अधिकारियों की गैर मौजूदग रही। गश्ती दल में शामिल पुलिस ने कहा कि वो भीड़ देखकर आए हैं वो गश्ती दल पर हैं और यहां गश्ती करते हुए आए हैं। पुलिस ने परिजनों से कहा कि वो सभी थाना चले। वहीं परिजन अपने बच्चों के सामान को लेकर जाने की जिद्द पर अड़े थे।
गौरतलब है कि नीट की छात्रा 6 जनवरी को अपने कमरे में बेहोश मिली और 9 जनवरी को जिंदगी की जंग हार गई। इस बीच क्या हुआ है कैसे हुआ है इसकी जानकारी किसी को नहीं है और कहीं ना कहीं इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी साफ झलक रही है। मृतक जहानाबाद की रहने वाली थी। मृतका के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। थाना प्रभारी रौशनी कुमारी को 6 जनवरी को ही प्राथमिकी की प्रक्रिया शुरू करनी थी, हॉस्टल और कमरे को सील करना था, फोरेंसिक टीम बुलानी थी। लेकिन यहां तो पूरा सीन ही खुला छोड़ दिया गया।
न कमरा सील हुआ, न बिस्तर, न कपड़े जब्त हुए। यही वो “गोल्डन टाइम” था, जब सबूत इकट्ठा किए जाते। पुलिस उस वक्त सबसे सुस्त, सबसे खामोश रही। तीन दिन तक पुलिस सीन से गायब रही। इस दौरान हॉस्टल का कमरा खुला रहा, सबूतों से छेड़छाड़ का पूरा मौका मिला। तीन लोगों को हिरासत में लेकर छोड़ दिया गया, लेकिन हॉस्टल की गहन तलाशी नहीं हुई।
थाना प्रभारी ने एक कहानी गढ़ दी-सुसाइड की कहानी। उसी स्क्रिप्ट को एएसपी,एसपी और एसएसपी तक आगे बढ़ाते रहे। बिना सवाल, बिना क्रॉस-चेक, बिना री-एप्रेजल। एसपी परिचय कुमार ने तो बिना पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मीडिया के सामने जजमेंट सुना दिया-“रेप हुआ ही नहीं।” नींद की गोली और मोबाइल सर्च की कहानी गढ़ी गई। बाद में मेडिकल रिपोर्ट ने इन दावों को उलट दिया।
पोस्टमॉर्टम में गर्दन, कंधे, चेस्ट पर नाखूनों के निशान, पीठ पर रगड़ से पड़े नीले धब्बे, और जननांग पर ताज़ा चोट व टिश्यू ट्रॉमा मिले। मेडिकल ओपिनियन साफ था-फोर्सफुल पेनीट्रेशन हुआ। एक से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं। यह सुसाइड नहीं, यह स्ट्रगल की कहानी है । पुलिस ने कहा लड़की नींद की गोली से बेहोश थी, जबकि पोस्टमॉर्टम के मुताबिक सभी चोटें मौत से पहले की थीं। यानी पीड़िता ने विरोध किया। ओवरडोज से चेस्ट नोचने के निशान और कंधों पर गहरे नाखून नहीं आते।


