आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी की अटकलें तेज

Dayanand Roy
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पटना : बिहार में खरमास के बाद नये सियासी समीकरण बनते रहे हैं।यह  कोई नई बात नहीं है। मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा के साथ खरमास खतम होते ही तरह-तरह की अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।

बिहार की सियासत में एक बार फिर कुछ बड़े नेता और कई विधायकों के पाला बदल की आहट सुनाई देने लगी है। इसी क्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के इजराइल से आधिकारिक दौरा पूरा कर पटना लौटते ही आरसीपी सिंह की पार्टी में एंट्री की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

जदयू के भीतर अब उनके स्वागत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनके बढ़ते तालमेल का परिणाम माना जा रहा है।  पटना में  आरसीपी के समर्थन और उनकी  वापसी  को  लेकर कई जगहों पर पोस्टर भी लगाए गए हैं।दरअसल जदयू का फोकस अब संगठन की मजबूती और विस्तार पर है।सूत्रों की माने तो विपक्ष के कई विधायक पार्टी के संपर्क में हैं।

गौरतलब है कि ललन सिंह अभी इजराइल के 3-दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं। वहां उन्होंने 13 जनवरी से 15 जनवरी  तक ‘ब्लू फूड सिक्योरिटी: सी द फ्यूचर’ समिट में भाग लिया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने भारत-इजराइल के बीच मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर में सहयोग के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। चर्चा है कि उनके पटना लौटते ही आरसीपी सिंह के जॉइनिंग पर अंतिम मुहर लग सकती है।

बता दें कि पार्टी के भीतर आरसीपी सिंह के प्रति विरोध अब कम होता दिख रहा है। जदयू विधायक एवं पूर्व मंत्री श्याम रजक ने उन्हें सार्वजनिक रूप से आमंत्रित करते हुए कहा कि जदयू उनका अपना घर है और वे जब चाहें वापस आ सकते हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठन के शीर्ष नेताओं ने भी उनकी वापसी के लिए अपनी सहमति दे दी है, जिसके चलते जदयू कार्यालय के बाहर उनके स्वागत के पोस्टर भी लगाए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि आरसीपी सिंह ने हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर प्रशंसा की है। पटना के पटेल भवन में आयोजित ‘चूड़ा-दही’ भोज के दौरान उन्होंने नीतीश कुमार को अपना “अभिभावक” बताया और बिहार के विकास कार्यों को ऐतिहासिक करार दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के साथ उनके 25 वर्षों के करीबी संबंध हैं और उनके बीच कोई दूरी नहीं है। जदयू के जानकारों का मानना है कि आरसीपी सिंह के पास पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का लंबा अनुभव है।

उनके वापस आने से पार्टी को न केवल लव-कुश समीकरण को साधने में मदद मिलेगी, बल्कि आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए संगठन भी मजबूत होगा। अब सभी की नजरें  आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।

इस बीच जदयू नेतृत्व पर मुख्यमन्त्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को पार्टी में लाने के लिए दवाब बढ़ रहा है।

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