रांची: 12 दिन पहले धुर्वा से लापता हुए दो भाई-बहनों को बुधवार को रामगढ़ में अपहरणकर्ताओं के चंगुल से मुक्त करा लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। दोनों बच्चे अंश और अंशिका दो जनवरी को अपने घर के पास एक किराने की दुकान पर जाने के बाद लापता हुए थे।
बच्चों की उम्र चार वर्ष और पांच वर्ष है। उन्हें वापस लाने के लिए रांची से एक पुलिस टीम रामगढ़ भेजी गई थी। दोनों बच्चे 2 जनवरी की दोपहर से लापता थे। मामला सामने आते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया।
बच्चों की तलाश के लिए रांची पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था। इसके बाद राज्यभर में व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया गया। अंश और अंशिका की खोज में धनबाद, बोकारो, जामताड़ा समेत कई जिलों में पुलिस ने लगातार छापेमारी की।
रांची पुलिस की टेक्निकल सेल ने कॉल डंप के दौरान कई संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान की, जिनमें कुछ नंबर धनबाद से जुड़े पाए गए। इसके बाद महुदा से लेकर चिरकुंडा तक ताबड़तोड़ छापेमारी की गई।
इस दौरान अलग-अलग जगहों से आधा दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। बच्चों की तलाश के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल भी उठे थे और झारखंड पुलिस पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था।
इस बीच भाजपा प्रवक्ता अजय शाह ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि एक आपराधिक गिरोह द्वारा बच्चों की तलाश के लिए 2 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की गई है, जिसे लेकर प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
बच्चों की सकुशल बरामदगी के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची पुलिस और झारखंड पुलिस की खुलकर प्रशंसा की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि अपहरणकर्ताओं के चंगुल से दो मासूम जिंदगियों का आजाद होना बेहद सुकून देने वाला है।
उन्होंने लिखा कि व्यक्तिगत रूप से उनके लिए पिछले कुछ दिन काफी परेशान करने वाले रहे।

