महेश कुमार सिन्हा
पटना : बिहार में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा(रालोमो) में टूट के आसार नजर आ रहे हैं। पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के परिवार प्रेम से विधायकों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।
रालोमो के चार में से तीन विधायक माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह नाराज बताए जा रहे हैं। शायद यही वजह कि उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर मंगलवार की रात लिट्टी-चोखा भोज में ये तीनों विधायक शामिल नहीं हुए। इनकी गैरमौजूदगी से सियासी गलियारों में अटकलों का बाजारगर्म हो गया है। राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि पार्टी के तीनों विधायकों ने लिट्टी-चोखा भोज में शामिल न होकर साफ संकेत दे दिया है कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक ठाक नहीं है।
लिट्टी-चोखा भोज में शामिल होने के बजाय इन तीनों विधायकों ने अगले दिन बुधवार को पटना में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। इस मुलाकात को नई राजनीति की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। दरअसल, पार्टी के अंदर नाराजगी की बड़ी वजह उपेंद्र कुशवाहा का पारिवारिक फैसला बताया जाता है।
चर्चा है कि वे अपनी पत्नी को पार्टी विधायक दल का नेता बनाना चाहते थे। इस फैसले से विधायक नाराज हो गए। विधायकों के विरोध को देखते हुए बाद में माधव आनंद को विधायक दल का नेता बनाया गया। उधर कुशवाहा के पुत्र मोह के कारण भी पार्टी में असंतोष बढ़ता जा रहा है। मौजूदा घटनाक्रम से साफ है कि रालोमो के अंदर सियासी तनाव लगातार गहराता जा रहा है।
वहीं रालोमो के तीनों विधायकों के भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात किए जाने के सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं। बिहार की राजनीति में नई सियासी चाल और संभावित समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार तीनों विधायक आपस में पूरी तरह एकजुट नजर आ रहे हैं। उनकी यह एकजुटता संकेत दे रही है कि वे कोई भी फैसला सामूहिक रूप से लेने के मूड में हैं।
विधायकों की भावी रणनीति क्या है और उनका अगला कदम किस दिशा में जाएगा, इसे लेकर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन ऐसी संभावना व्यक्त की जाने लगी है कि उपेन्द्र कुशवाहा से नाराज तीनों विधायक भाजपा का दामन थाम सकते हैं।
मालूम हो कि बीते दिनों रालोमो विधायक रामेश्वर महतो की नाराजगी की खबर सामने आई थी। रामेश्वर महतो ने अपने फेसबुक पर लिखा था कि “राजनीति में सफलता केवल भाषणों से नहीं, बल्कि सच्ची नीयत और दृढ़ नीति से मिलती है। जब नेतृत्व की नीयत धुंधली हो जाए और नीतियाँ जनहित से अधिक स्वार्थ की दिशा में मुड़ने लगें, तब जनता को ज्यादा दिनों तक भ्रमित नहीं रखा जा सकता है।
आज का नागरिक जागरूक है- वह हर कदम, हर निर्णय और हर इरादे को बारीकी से परखता है। सूत्रों की मानें तो रामेश्वर महतो को उम्मीद थी कि उपेंद्र कुशवाहा उन्हें मंत्री पद के लिए आगे बढ़ाएंगे, लेकिन उनके बजाय कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया। इसके बाद से ही रामेश्वर महतो असहज और नाराज बताए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पत्नी को टिकट देकर विधायक बनवा दिया और वहीं बेटे को मंत्री बनाने में भी सफल रहे। इसको लेकर पार्टी के अंदर कुछ नेताओं के बीच असंतोष की खबर सामने आ रही थी।
अब रालोमो के तीन विधायकों ने कुशवाहा के लिट्टी-चोखा भोज में नहीं शामिल होकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक न तो उपेंद्र कुशवाहा और न ही विधायकों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।
