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केंद्र सरकार ने अरावली में नए खनन पट्टों पर लगाया प्रतिबंध, संरक्षित क्षेत्र का होगा विस्तार

by Dayanand Roy

 

नई दिल्ली : केंद्र ने बुधवार को राज्यों को अरावली पर्वतमाला में नए खनन पट्टे देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) को पूरे अरावली क्षेत्र में अतिरिक्त क्षेत्रों और जोन की पहचान करने का निर्देश दिया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह प्रतिबंध पूरे अरावली भूभाग पर समान रूप से लागू होता है। इसका उद्देश्य पर्वत श्रृंखला की अखंडता को संरक्षित करना है। इन निर्देशों का लक्ष्य गुजरात से लेकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) तक फैली एक सतत भूवैज्ञानिक श्रृंखला के रूप में अरावली की रक्षा करना और सभी अनियमित खनन गतिविधियों को रोकना है।

संपूर्ण अरावली क्षेत्र के लिए सतत खनन हेतु एक व्यापक, विज्ञान-आधारित प्रबंधन योजना (एमपीएसएम) तैयार करते समय आईसीएफआरई को यह कवायद करने का निर्देश दिया गया है

इस योजना के तहत संचयी पर्यावरणीय प्रभाव और पारिस्थितिक वहन क्षमता का आकलन किया जाएगा, पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील और संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। बहाली तथा पुनर्वास के लिए उपाय किए जाएंगे। सरकार अरावली पारिस्थितिकी तंत्र के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, क्योंकि वह मरुस्थलीकरण को रोकने, जैव विविधता के संरक्षण, जलभंडारों के पुनर्भरण और क्षेत्र के लिए पर्यावरणीय सेवाएं प्रदान करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानती है।

कांग्रेस ने अरावली के मुद्दे को लेकर बुधवार को मोदी सरकार फिर निशाना साधा और सवाल किया कि वह इस पर्वतमाला की परिभाषा में इतनी बड़ी खामियों वाले बदलाव को आगे बढ़ाने पर क्यों अड़ी हुई है। पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि अब यह बिल्कुल साफ हो गया है कि अरावली मुद्दे पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पूरी तरह से सच नहीं बता रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं। अरावली की परिभाषा में जो बदलाव मोदी सरकार कर रही है, उसका भारतीय वन सर्वेक्षण, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय विशेषाधिकार समिति और सुप्रीम कोर्ट के न्याय मित्र ने स्पष्ट और जोरदार विरोध किया है।

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