पाकुड़ : झारखंड विधानसभा की प्रत्यायुक्त समिति के सभापति सरयू राय ने पाकुड़ प्रखंड के बरमसिया और सोनाजोरी स्थित करीब पंद्रह करोड़ साल पुराने प्राचीन जीवाश्म स्थलों का निरीक्षण किया। उन्होंने क्षेत्र में पाए जा रहे जीवाश्मों की स्थिति, संरक्षण की आवश्यकता और भविष्य में संभावित वैज्ञानिक अनुसंधान की जानकारी ली।
सभापति श्री राय ने कहा कि यह क्षेत्र भू-विरासत (जियो हेरिटेज) की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इन स्थलों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संरक्षण और व्यवस्थित अध्ययन किया जाए, तो राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है।

श्री राय ने जीवाश्म स्थलों के संरक्षण के लिए ठोस नीति और विधिक प्रावधान बनाने पर जोर दिया, ताकि इन धरोहरों को सुरक्षित रखते हुए व्यापक अनुसंधान को प्रोत्साहन दिया जा सके। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि जीवाश्म स्थलों को क्षति से बचाने और अवैध खनन या छेड़छाड़ रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
वहीं, पाकुड़ सदर प्रखंड के कई इलाकों में फॉसिल्स पाए जाने को लेकर बॉटनी के प्रोफेसर डॉ. प्रसनजीत मुखर्जी का कहना है कि पाकुड़ राजमहल पहाड़ी क्षेत्र में आता है और पाकुड़ में पूर्व में भी फॉसिल्स पाया गया है।
इन इलाकों में वैज्ञानिक डॉ. बीरबल सहनी और डॉ बीडी शर्मा ने फॉसिल्स की खोज की थी। राजमहल पहाड़ी क्षेत्र में पाए जाने वाले फॉसिल्स 68 से 145 मिलियन साल पुराने हैं, यह अनुमान लगाया गया है। अब तक जो भी फॉसिल्स मिले हैं, वह सभी पेड़-पौधों के हैं। प्रोफेसर ने बताया कि अबतक के सर्वे और शोध में डायनासोर या कोई भी जीव जंतु का फॉसिल्स नहीं मिला है।

यह फॉसिल्स कितना पुराना है सही जानकारी मिल जाती तो उस वक्त का वातावरण कैसा होगा, जीव जंतु का किस तरह का विकास हुआ होगा यह पता चल सकता है। प्रोफेसर ने कहा कि जहां भी इन इलाकों में फॉसिल्स मिला है, लोग जानकारी के अभाव में उसे उठा ले जाते हैं और नष्ट कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि फॉसिल्स से पिछले जीवन का साक्ष्य मिलेगा। पृथ्वी के इतिहास को समझने में आसानी होगी। साथ ही मानव विकास की जानकारी हासिल की जा सकती है तथा जलवायु के बारे में भी हम बहुत कुछ सीख सकते हैं।
प्रोफेसर ने कहा कि फॉसिल्स के संरक्षण के लिए कई कदम उठाया गया, लेकिन उसे संरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। राजमहल की पहाड़ी में निकलने वाला काला पत्थर फेमस है और इन इलाकों में ज्यादा माइनिंग होने के कारण अधिकांश फॉसिल्स पत्थर के साथ बिक गया है। प्रो. मुख़र्जी ने कहा कि फॉसिल्स को बचाने के लिए राज्य ही नहीं बल्कि केंद्रीय दल को भी आना चाहिए और इसका सर्वे कर उसे सुरक्षित एवं संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए।

