हेमंत सोरेन ने झारखंड स्थापना दिवस पर दी 8799 करोड़ की योजनाओं की सौगात, कहा- 2050 तक के नये झारखंड के विजन पर काम कर रही है सरकार

Dayanand Roy
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रांची : झारखंड के 25 वें स्थापना दिवस और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड को 8799 करोड़ की योजनाओं की सौगात दी। उन्होंने और राज्यपाल संतोष गंगवार ने रिमोट का बटन दबाकर योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार अगले 25 वर्ष यानि 2050 के विकसित झारखंड की परिकल्पना पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस राज्य को आगे ले जाने की जिम्मेवारी राज्य सरकार के साथ राज्य के नागरिकों के कंधों पर भी है। राज्य के सर्वांगीण विकास और इसे सजाने-संवारने में सबको अपना योगदान देना होगा।

उन्होंने कहा कि झारखंड ने देश को बहुत कुछ दिया। दुनिया में भारत की पहचान बनी तो उसमें झारखंड की भी भूमिका रही। हमने देश को खनिज संपदा के साथ मेहनती श्रम बल भी दिया। हमें उम्मीद है कि देश भी इस राज्य को उसका सम्मान और अधिकार देगा जिसके हम अधिकारी हैं। मेरा मानना है कि देश विकसित तभी होगा जब राज्य विकसित होगा और राज्य तभी विकसित होगा जब गांव विकसित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

हेमंत ने कहा कि प्रकृति ने राज्य को खनिज संपदा के साथ प्राकृतिक संसाधनों से भी नवाजा है। राज्य में जमीन के नीचे समृद्धि तो है ही इसके ऊपर भी समृद्धि है। हमारी सरकार सिर्फ खनिज संपदाओं के इर्द-गिर्द नहीं बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से कैसे समृद्धि आए, इस दिशा में काम कर रही है। आज हमारे बच्चे सिर्फ स्कूल और कॉलेजों में ही टॉप नहीं कर रहे बल्कि खेल में भी पूरी दुनिया में अपना परचम लहरा रहे हैं। आज लोग कह रहे हैं कि झारखंड बहुत बदला है और बहुत तेजी से बदल रहा है।

लोगों से यह सुनकर काम करने का उत्साह जगता है और तेजी से काम करने की इच्छा होती है। आज प्राकृतिक संतुलन बनाते हुए राज्य को विकसित कैसे किया जाए, इस दिशा में सरकार काम कर रही है। आनेवाले दिनों में झारखंड में शोषण और गरीबी का दंश खत्म होता दिखेगा। हमने झारखंड के बजट का आधा प्रतिशत हिस्सा राज्य की आधी आबादी को दिया है।

यह दिख छोटा रहा है पर इसका प्रभाव बहुत बड़ा है। इतना बड़ा है कि दूसरे राज्य इससे प्रभावित होकर अपने राज्यों में इसे लागू कर रहे हैं। अब झारखंड बहुत पीछे नहीं रहेगा। राह में कुछ व्यवधान हैं, पर उसे खत्म करते हुए हम आगे बढ़ेंगे। हेमंत ने कहा कि आदिवासी सिर्फ आदिवासी नहीं, बल्कि इस देश के प्रथम वारिस हैं। अब झारखंड देश के अग्रणी

 राज्यों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है। अपने संबोधन में हेमंत ने अपने पिता और दिशोम गुरू शिबू सोरेन के योगदान को भी याद किया।

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