देश का संविधान देता है हमें धर्म चुनने की आजादी : शिल्पी नेहा तिर्की

Dayanand Roy
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रांची : देश का संविधान हमें धर्म चुनने की आजादी देता है। पर इसका मतलब ये कतई नहीं है कि इससे व्यक्ति की जाति बदल जाती है। रविवार को ये बातें कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहीं।

वे संत फ्रांसिस चर्च बनहोरा परिसर में पल्ली दिवस समारोह और मांडर विकारिएट कैथोलिक महिला संघ की 56 वीं वार्षिक आम सभा में शामिल हुई। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ईश्वर के कई रूप हैं।

हर रूप में ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास एक समान है। जिसने सृष्टि की रचना की उन्हें अलग-अलग रूपों में हम पूजते हैं।

कुछ खास धर्मों को निशाने पर लिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण

कृषि मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से कुछ खास धर्मों को निशाने पर लिया जा रहा है, ये दुर्भाग्यपूर्ण है।  ये हमारे देश की पहचान और संस्कृति नहीं है। सत्ता पर काबिज होने वाले लोग समाज को बांटने, समाज में धर्म और जाति का जहर घोलने तथा सामाजिक कटुता पैदा करने की राजनीति कर रहे हैं। ऐसे राजनीतिक दलों से ना सिर्फ सचेत रहने की जरूरत है, बल्कि सामाजिक चेतना पैदा कर उनका मुंह तोड़ जवाब देना होगा।

मंत्री ने कहा कि इसमें महिलाओं की बड़ी भूमिका अदा करनी होगी। आज कई आंदोलनों में महिलाओं की भागीदारी ने उसे सफल बनाया है। महिलाओं की भागीदारी के बगैर संतुलित परिवार या समाज की परिकल्पना बेमानी होगी।

जरूरत सामाजिक चेतना के साथ राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने की है। एकजुट समाज ही विकसित समाज के सपने को साकार कर सकता है। पल्ली दिवस कार्यक्रम में पुरोहित फादर एंथनी हेंब्रम, फादर सुमन एक्का, फादर मनोज कुल्लू वहीं महिला संघ की आम सभा में फादर विपिन कंडुलना, के सुधा, सेराफिना मिंज, मारखा टोप्पो, रौशन तिग्गा, शिला तिग्गा सहित अन्य शामिल थे।

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