एनडीए में शीट शेयरिंग इस माह के अंत तक

Dayanand Roy
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महेश सिन्हा

चिराग की महत्वाकांक्षा से अटका है मामला

घटक दलों की ताकत के हिसाब से होगा सीटों का बंटवारा

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर  एनडीए  के घटक दलों के बीच  सीट बंटवारे पर फैसला इस माह के अंत तक होने की संभावना है। भाजपा सूत्रों के अनुसार एनडीए में शीट शेयरिंग फार्मूला लगभग तय हो गया है।

लेकिन लोजपा-रा प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की महत्वाकांक्षा के कारण  यह मामला अटका हुआ है।  चिराग पासवान  पिछले दो चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन  के आधार पर अधिक से अधिक  सीटें हासिल करने के फिराक में हैं।

हालांकि भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व यह साफ कर  चुका है कि 2020 के विधान सभा चुनाव, 2024 के लोकसभा चुनाव और  मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों  को देखते हुए ही सीटों का बंटवारा होगा। सूत्रों के अनुसार  यह भी साफ कर दिया गया है कि गठबंधन में सभी दल सहयोगी होंगे। कोई बड़ा या छोटा भाई नहीं होगा।

भाजपा ने यह भी कहा है कि सीटों का बंटवारा जीत के आधार पर होगा और  वह किसी पार्टी या नेता के दवाब में नहीं आयेगी। इसके बावजूद चिराग पासवान कभी खुद  के बयानों से और कभी अपने बहनोई सांसद अरुण भारती के बयानों के जरिए दवाब बनाने की कोशिश करते रहे हैं। यही वजह है कि एनडीए में सीट शेयरिंग  में देरी हो रही है।

सूत्रों की मानें तो अब तक तय फार्मूले के मुताबिक इस बार भाजपा और जदयू बराबर-बराबर सीटों पर लड़ेंगे। सूत्रों के अनुसार दोनों के बीच  103-103 सीटों पर लड़ने की सहमति बनी है। 2020 में हुये पिछले विधान सभा चुनाव में जदयू 115 और भाजपा 110 सीटों पर लड़ी थी। उस चुनाव  में वीआईपी 11 और  हम  7 सीटों पर लड़ी थी।वीआईपी इस  बार  एनडीए में नहीं है।

वह अभी महागठबंधन का हिस्सा है। पिछले चुनाव मे एनडीए में चार ही दल थे-भाजपा,जदयू,वीआईपी और हम। लोजपा उस  चुनाव  में अकेले लड़ी थी। लेकिन इस बार  लोजपा-रा के साथ आने से एनडीए  में पांच दल हो गये। भाजपा,जदयू,लोजपा-रा,हम और रालोमो। सूत्रों के अनुसार भाजपा और  जदयू के बाद सबसे अधिक 20-24 सीटें लोजपा-रा को मिल सकती है।

हालांकि,पिछले विधान सभा चुनाव में यह अकेले लड़ी थी जिससे एनडीए और खास कर जदयू को काफी नुकसान हुआ था। लेकिन लोकसभा चुनाव चिराग की पार्टी साथमिलकर लड़ी थी और उसका प्रदर्शन बहुत ही बढ़िया रहा था। हम को 10 और  रालोमो को 8 सीटें देने की बात  है।हालांकि, इस पर अंतिम  मुहर सभी घटक दलों के शीर्ष नेताओं की बैठक  में लगेगी। सीटों के बंटवारे के बाद विधान सभा क्षेत्र के बारे में फैसला होगा। इस  दौरान  कुछ सीटों की अदला-बदली भी हो सकती है।

 गौरतलब है कि लोजपा-रा ने 50 सीटों की मांग की है। पार्टी का कहना है कि 2015 में उसने 43 और 2020 में 135 सीटों पर चुनाव लड़ा था, इसलिए इस बार 43 से 135 सीटों के बीच हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

वहीं ,हम पार्टी के प्रमुख जीतनराम मांझी ने कहा कि पिछली बार 7 सीटों पर लड़े थे, अब पार्टी मजबूत हुई है, इसलिए 20–22 सीटें चाहिए। मांझी ने कहा है कि यदि एनडीए  में  सम्मानजनक सीटें नहीं मिली तो उनकी पार्टी 100 सीटों पर अकेले चुनाव  लड़ेगी।वहीं, रालोमो ने भी कम से कम 10 सीटों की दावेदारी जताई है। सूत्रों के मुताबिक, जिन विधायकों ने पिछली बार कम अंतर से जीत हासिल की थी, उनकी सीटें बदली जा सकती हैं।

इस बीच एनडीए ने फिर दोहराया है कि चुनाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। गठबंधन के कार्यक्रमों में लगातार नारा दिया जा रहा है, “2025 फिर से नीतीश”।

लेखक न्यूजवाणी बिहार के संपादक हैं।

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