खूंटी के जंगलों में बसा है मोरों का स्वर्ग

Dayanand Roy
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खूंटी (अजय शर्मा) : झारखंड के खूंटी जिले के घने जंगलों में राष्ट्रीय पक्षी मोर की चहलकदमी इन दिनों प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जिले के मुरहू प्रखंड स्थित पतकी ईकिर, घघारी, जाते और कोनवा गांव के बीच फैले जंगलों से लेकर अड़की प्रखंड के बेड़ाहातू, कोचांग, मदहातू तथा सदर प्रखंड के सिरकापिड़ी जैसे इलाकों में इनकी भरपूर मौजूदगी देखी जा रही है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मोर अक्सर पतकी ईकिर में झील जैसे फैले बनई नदी के किनारे पानी पीते नजर आते हैं। घघारी गांव के पौलुस बोदरा ने बताया कि यहां के जंगलों में मोरों की अच्छी-खासी संख्या है और लोग इन्हें रोजाना देख पाते हैं। सिरकापिड़ी के जंगलों से लोग मोर के अंडे लाकर मुर्गियों से सेंतवाते हैं, जिनके साथ मोर के बच्चे पलते-बढ़ते हैं और बड़े होने पर वापस जंगलों की ओर लौट जाते हैं।

मोरों के लिए अनुकूल हैं खूंटी-सिमडेगा के जंगल

राज्य के विशेष कार्य पदाधिकारी एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अर्जुन बड़ाईक ने बताया कि खूंटी और सिमडेगा के जंगल मोरों के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। यहां की जलवायु और जैव विविधता उन्हें पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आश्रय प्रदान करती है। मोर दाना, कीड़े-मकोड़े, सांप, बिच्छू, छिपकली, घास के बीज, चिरौंजी, फल और केंचुए आदि खाते हैं। उनकी भोजन प्रणाली पर्यावरण के संतुलन में भी मददगार होती है।

अंडों की सुरक्षा और बच्चों की देखभाल करती है मोरनी

मोरनी जमीन पर बने छोटे गड्ढों में सूखे पत्ते इकट्ठा कर अंडे देती है। एक बार में वह 10 से 12 अंडे देती है और उन्हें 28 से 30 दिनों तक सेती है। चुजे निकलने के बाद मोरनी उनकी देखभाल करती है। यह प्रकृति का एक अनूठा दृश्य होता है, जिसे देख पाना किसी सौभाग्य से कम नहीं।

कानूनी संरक्षण

मोर वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित प्राणी है। इसे मारना, पकड़ना, अंडे नष्ट करना, पंख उखाड़ना या व्यापार करना अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके लिए अधिकतम दो साल की जेल या एक लाख रुपये जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है।

डीएफओ की चेतावनी

खूंटी के वन प्रमंडल पदाधिकारी दिलीप कुमार यादव ने बताया कि जिले में मोरों की कोई निश्चित गणना नहीं है, लेकिन यदि किसी ने मोर को नुकसान पहुंचाने, पकड़ने या व्यापार करने की कोशिश की, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत दोषियों पर मामला दर्ज किया जाएगा।

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