
‘इंडिया’ के सहयोगी दल 8 सीटों पर आपस में भिड़ेंगे

महेश कुमार सिन्हा

पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव की बिसात अब पूरी तरह बिछ चुकी है। पहले चरण की 121 सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी परिदृश्य भी साफ होने लगी है। मुख्य मुकाबला दोनों प्रमुख गठबंधनों एनडीए और ‘इंडिया’ के बीच है। एनडीए के पांचो घटक दलों ने आपसी तालमेल से पहले चरण की सभी 121 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
जबकि पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इंडिया गठबंधन में सीटों की खींचतान जारी है। ऐसे में पहले चरण की 121 में से आठ सीटों पर ‘इंडिया’ के सहयोगी दल आपस में भिड़ेंगे। लालगंज, वैशाली और कहलगांव में राजद और कांग्रेस आमने-सामने हैं। बछवाड़ा,रोसड़ा(सुरक्षित), राजापाकर (सुरक्षित) और बिहार शरीफ में कांग्रेस व भाकपा के बीच टकराव है।
तारापुर में राजद और वीआईपी के उम्मीदवार आपस में टकरा रहे हैं। इंडिया गठबंधन के शीर्ष शीर्ष नेताओं की कई दौर की बैठकों के बाद भी इन सीटों का पेच नहीं सुलझा। आखिरकार सहयोगी दलों ने इन पर दोस्ताना संघर्ष का फैसला किया है।
पहले चरण की 121सीटों में से 113 पर एनडीए और ‘इंडिया’ के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला होगा।दोनों गठबंधन अपनी जीत का दावा कर रहा है। कोई किसी से हार मानने को तैयार नहीं है।पर टिकट वंटवारे में एनडीए के घटक दलों का चयन बेहतर बताया जा रहा है।
इसकी पांचो पार्टियों ने उम्मीदवारों के चयन में अपने-अपने सामाजिक आधार पर विशेष ध्यान रखा है।भाजपा ने सवर्ण और वैश्य का कोटा पूरा किया है।जबकि जदयू ने लव-कुश(कुर्मी-कोइरी)और अति पिछड़ों को तरजीह दी है।
लोजपा (रा)हम और रालोमो ने भी अपने बेस वोट के हिसाब से उम्मीदवारी तय की है। कुल मिलाकर एनडीए ने सभी जातियों को साधने का प्रयास किया है।
लेखक न्यूजवाणी बिहार के संपादक हैं।


