
भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद यह सवाल उठ रहा है

महेश कुमार सिन्हा
पटना : बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद सूबे में सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्य मंत्री आवास पर शनिवार सुबह से ही नेताओं का आने जाने का सिलसिला जारी रहा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने सबसे पहले उनके करीबी मंत्री विजय कुमार चौधरी सीएम आवास पहुंचे थे। उसके बाद केंद्रीय मंत्री व लोजपा(रा)प्रमुख चिराग पासवान और कई अन्य नेता पहुंचे। पार्टी सूत्रों के अनुसार जदयू ने अपने सभी नवनिर्वाचित विधायकों को रविवार को पटना बुलाया है। जदयू ने इस बार शानदार वापसी करते हुए 85 सीटों पर जीत दर्ज की है।
पिछले विधानसभा चुनाव में वह 43 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। इस बार उसे 42 सीटों का फायदा हुआ है। लेकिन विधानसभा के इस चुनाव में सबसे अधिक फायदा भाजपा को हुआ है। भाजपा 89 सीटें हासिल कर बिहार में पहली बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बाद यह सवाल फिर उठने लगा है कि अब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री होंगे या नहीं?
सबसे पहले यह सवाल तब उठा था जब इसी साल जून में एक निजी चैनल को साक्षात्कार में भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था ” बिहार का मुख्यमंत्री कौन होगा,यह तो वक्त ही बताएगा,लेकिन यह साफ है कि हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेंगे।” फिर 16 अक्टूबर को एक कार्यक्रम मे जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो अमित शाह ने कहा ” ये तय करने वाला मैं कौन होता हूं कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। सभी सहयोगी मिलकर विधायक दल का नेता चुनेंगे।
हालांकि, बीते एक नवंबर को अमित शाह ने साफ कर दिया था कि नीतीश ही सीएम बनेंगे। उन्होने कहा था ” इसमें कोई कन्फ्यूजन नहीं है। मैं स्पष्ट करता हूं कि नीतीश ही मुख्यमंत्री हैं और चुनाव जीतने के बाद भी वही रहेंगे। हालांकि,चुनाव जीतने के बाद यह सवाल फिर खड़ा हो गया है। क्योकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा है कि सबसे बात कर मुख्यमंत्री तय करेंगे।
हालांकि , जदयू से अधिक सीटें जीतकर और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद भाजपा फिलहाल नीतीश कुमार को अस्थिर करना नहीं चाहेगी। क्योकि केन्द्र की राजनीति में भाजपा को नीतीश की जरूरत है। केंद्र की मोदी सरकार दो बैशाखी के सहारे चल रही है जिसमें एक जदयू है।इसलिए भाजपा अभी कोई दांव लगाना नही चाहेगी। लेकिन वह महत्वपूर्ण मंत्रालय और बड़े विभाग जरूर लेना चाहेगी।
वैसे भाजपा के लिए अब अपनी सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है। वह चाहे तो जदयू के बिना भी एनडीए के बाकी सहयोगियों के साथ जोड़ तोड़ कर सरकार बना सकती है। जदयू को छोड़कर उसके पास बहुमत ( 122) से चार सीट कम 118 सीटें हैं। भाजपा जोड़ तोड़ में माहिर है। वह कांग्रेस और अन्य दलों तोड़ कर सरकार बना सकती है।
अगर वह ऐसा नहीं करेगी तो गठबंधन धर्म निभाने और केंद्र सरकार को स्थिर रखने के लिए। ऐसे में यदि खुद वह स्वास्थ्य कारणों से सीएम बनने से इंकार नही कर देते तो फिलहाल नीतीश कुमार के ही फिर बिहार के मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद है।


