Home Bihar बिहार में 2005 से 2025 तक नीतीशे कुमार, आखिर कुछ तो है सुशासन बाबू में

बिहार में 2005 से 2025 तक नीतीशे कुमार, आखिर कुछ तो है सुशासन बाबू में

by Dayanand Roy

महेश कुमार सिन्हा

पटना : बिहार में 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नीतीश कुमार ने देश में एक नया रिकॉर्ड बनाया। उन्होने गुरुवार को नौवीं बार सीएम की शपथ लेने का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा। कोई और  इसे अभी तक नहीं तोड़ पाया था।

तमिलनाडु में जयललिता और हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह ने छह-छह बार  सीएम पद  की शपथ ली थी। ओडिशा में नवीन पटनायक और सिक्किम में पवन चामलिंग पांच-पांच बार  मुख्यमंत्री बने थे।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु भी पांच  ही बार सीएम बने थे। नीतीश कुमार  इससे पहले 2024, 2022, 2020, 2017, 2015 में दो बार, 2010, 2005 और 2000 में मुख्यमंत्री पद  की शपथ ले चुके हैं।

नीतीश कुमार वर्ष 2000 में केंद्र की राजनीति से लौट कर बिहार आये थे। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप  में उनका पहला कार्यकाल  बहुत ही संक्षिप्त तीन मार्च 2000 से 10 मार्च 2000 तक रहा। इसके बाद  वह कुछ  समय छोड़ लगातार मुख्यमंत्री बने रहे।

बिहार में सबसे अधिक दिनों तक मुख्यमंत्री के रूप में काम करने का रिकॉर्ड  नीतीश कुमार  पहले ही अपने नाम कर चुके हैं। हालांकि,सूबे में लगातार सबसे अधिक दिनों तक मुख्यमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड वह अपने नाम  नहीं कर पाए। क्योकि बीच में सत्ता उन्होने जीतनराम मांझी को सौंप दी थी। अभी तक यह रिकॉर्ड राज्य  के पहले मुख्यमंत्री डाॅ श्रीकृष्ण सिंह के नाम  है।

सुशासन बाबू के नाम से अपनी पहचान बनाने वाले नीतीश कुमार बिहार की आधुनिक राजनीतिक दिशा के निर्माता हैं। इनकी भूमिका आने वाले वर्षों में भी निर्णायक  रहेगी। राज्य की राजनीति में सुशासन और स्थिर नेतृत्व का चेहरा माने जाने वाले नीतीश कुमार ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि उन्हें देश के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल करती है। उनका राजनीतिक सफर न केवल अनुभव और परिपक्वता का प्रतीक है, बल्कि बिहार के सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे में गहरे परिवर्तन का दास्तावेज भी है।

1951 में पटना जिले के बख्तियारपुर में जन्मे नीतीश कुमार ने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (अब एनआईटी पटना) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के बाद उनका रुझान राजनीति की ओर बढ़ा और 1970 के दशक में वे लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़ गए। इस आंदोलन ने उनके भीतर सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक चेतना को मजबूत आधार दिया।

1985 में वे पहली बार सांसद बने और इसके बाद राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने लगे। नीतीश ने केंद्र में रेल मंत्री, कृषि मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री जैसी अहम जिम्मेदारियां संभालीं थी। रेल मंत्रालय के कार्यकाल में उन्होंने यात्री सुविधाओं में सुधार और ट्रेन संचालन में नई पारदर्शिता लाने के लिए याद किया जाता है। किंतु उनका सबसे बड़ा प्रभाव बिहार की राजनीति में दिखाई देता है।

2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था, सड़क, बिजली और शिक्षा को सुधारने का व्यापक अभियान चलाया। उनके फैसलों ने बिहार की छवि बदलने में अहम भूमिका निभाई। महिला सशक्तिकरण नीतीश की नीतियों की सबसे बड़ी पहचान बनी, खासकर पंचायतों में 50 फीसदी आरक्षण और ‘कन्या उत्थान योजना’ के जरिए। सात निश्चय जैसी योजनाओं ने ग्रामीण विकास को नई दिशा दी।

शराबबंदी, हालांकि विवादों में रही, लेकिन इसे उन्होंने सामाजिक सुधार का हिस्सा कहा। गठबंधन की राजनीति को समझने और साधने की कला नीतीश की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने समय-समय पर राजनीतिक समीकरण बदले, पर हर बार शासन में बने रहे, यह उनकी स्वीकार्यता और रणनीतिक कौशल का प्रमाण है।

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