महेश कुमार सिन्हा
पटना : उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा पार्टी (रालोमो) में परिवारवाद को लेकर बगावत के स्वर उभरने लगे हैं। पार्टी के विधायक रामेश्वर महतो ने परिवारवाद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महतो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में पार्टी के नेतृत्व और नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल परिवार को आगे नहीं बढ़ाएं। रामेश्वर महतो के पोस्ट ने संगठन के भीतर नाराजगी और असंतोष को उजागर कर दिया है। दरअसल रामेश्वर महतो मंत्री नहीं बनाए जाने से बेहद खफा हैं।
पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनवा दिया है। इसको लेकर भीतरखाने लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। दीपक प्रकाश अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं।
रामेश्वर महतो ने फेसबुक पर लिखा है कि राजनीति में सफलता केवल भाषणों से नहीं, बल्कि सच्ची नीयत और दृढ़ नीति से मिलती है। जब नेतृत्व की नीयत धुंधली हो जाए और नीतियाँ जनहित से अधिक स्वार्थ की दिशा में मुड़ने लगें, तब जनता को ज्यादा दिनों तक भ्रमित नहीं रखा जा सकता। आज का नागरिक जागरूक है- वह हर कदम, हर निर्णय और हर इरादे को बारीकी से परखता है।
उनके इस बयान ने रालोमो खेमे में हलचल मचा दी है, क्योंकि पोस्ट में “नेतृत्व की नीयत धुंधली होने” और “स्वार्थ की दिशा में मुड़ने” जैसे शब्द सीधे तौर पर नेतृत्व पर सवाल उठाते हैं। सियासी हलकों में इसे उपेंद्र कुशवाहा पर निशाना माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, रामेश्वर महतो को उम्मीद थी कि उपेंद्र कुशवाहा उन्हें मंत्री पद के लिए आगे बढ़ाएंगे। लेकिन इसके बजाय कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया।
इसके बाद से ही रामेश्वर महतो असहज और नाराज बताए जा रहे हैं। रालोमो में पहले से ही परिवारवाद को लेकर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन अब विधायक के पोस्ट से यह साफ हो गया है कि पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सतह पर आ चुका है। फिलहाल पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन विधायक महतो के पोस्ट ने संगठन को मुश्किल में डाल दिया है। माना जा रहा है कि महतो का यह बयान सीधे तौर पर उपेंद्र कुशवाहा पर निशाना साधता है।
गौरतलब है कि उपेंद्र कुशवाहा पर इससे पहले उस समय भी परिवारवाद का आरोप लगा था जब उन्होने अपनी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा को सासाराम से चुनाव मैदान में उतारा था। उनके जीतने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि मंत्रिमंडल में रालोमो को अगर एक सीट भी मिलेगी तो स्नेहलता कुशवाहा ही मंत्री बनेगीं। लेकिन कुशवाहा ने समय आने पर अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनवा दिया,जो किसी सदन के सदस्य नहीं हैं।
जबकि विधानसभा चुनाव में रालोमो के चार विधायक जीत कर आयें हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत के दौरान कुशवाहा को आश्वस्त किया गया था कि विधानसभा की छह सीटों के अलावा उन्हे एक सीट विधान परिषद में भी दी जाएगी। ऐसे में कुशवाहा अब दीपक प्रकाश को विधान परिषद में भेजने का प्रयास करेंगे।
