बिहार में लोकतंत्र की नींव पर हमला: पूर्व नौकरशाह

Dayanand Roy
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नयी दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर 90 से अधिक पूर्व नौकरशाहों ने अपनी चिंता व्यक्त की है और इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा है कि इससे बड़ी संख्या में लोग मताधिकार से वंचित हो जाएंगे। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनके पास अपनी नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं।

तीन अखिल भारतीय और केंद्र सरकार की विभिन्न सेवाओं के 93 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने एक खुले पत्र में आरोप लगाया है कि बिहार में मतदाता सूची के ‘‘निरर्थक’’ एसआईआर को जारी रखना तथा इस प्रक्रिया को देश के बाकी हिस्सों में विस्तारित करना ‘‘भारतीय लोकतंत्र के सामने सबसे बड़े खतरों में से एक है।’’

पूर्व नौकरशाहों के समूह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जनसंख्या के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के एक बड़े हिस्से ने अपने मताधिकार को “भारतीय लोकतंत्र में सबसे बुनियादी हिस्सेदारी” के रूप में माना है, क्योंकि मतदाता सूची तैयार करने में उदार दृष्टिकोण अपनाया गया था, इस समझ के साथ कि कई भारतीयों के पास अपनी नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज नहीं हैं।

समूह ने तर्क दिया कि, “इस प्रक्रिया को अब उलट दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जिन लोगों के पास दस्तावेजों तक पहुंच नहीं है, उन्हें मतदाता के रूप में उनके अधिकारों से वंचित किया जाएगा।”

पूर्व नौकरशाहों ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग की यह कवायद उसे संवैधानिक जनादेश प्राप्त किए बिना ही नागरिकता अधिकारों पर प्रभावी रूप से निर्णय लेने वाला प्राधिकारी बनने की अनुमति देती है।

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