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बिहार में पुराना महाराष्ट्र मॉडल अपनाने में भाजपा को मिली कामयाबी

by Dayanand Roy

पुलिस प्रशासन से तालमेल बिठाना अब सम्राट की बड़ी चुनौती

महेश कुमार सिन्हा

पटना : भाजपा इस बार बिहार में नया नहीं तो पुराना महाराष्ट्र मॉडल लागू करने में सफल हो गई। राज्य में पहली बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद उसने जदयू प्रमुख नीतीश कुमार को बतौर मुख्यमंत्री तो स्वीकार कर लिया। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण गृह विभाग उनसे छीन लिया। आमतौर पर गृह विभाग मुख्यमंत्री अपने पास  ही रखते रहे हैं।

बिहार में 2005 से नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार चल रही है। नीतीश कुमार ने अब तक गृह विभाग अपने पास रखा था। लेकिन  20 साल बाद  पहली बार उन्होने भाजपा के लिए गृह विभाग छोड़ दिया। बिहार में 53 साल बाद ऐसा हुआ है जब गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास नहीं है। इससे पहले राज्य में दो गैर-कांग्रेसी सरकारों में ऐसा हुआ था।

पहली बार 1967 में महामाया प्रसाद सिन्हा की सरकार में और  दूसरी बार 1972 में कर्पूरी ठाकुर की सरकार में ऐसा हुआ था। दोनों ही बार रामानंद तिवारी गृह मंत्री बने थे। बिहार में इस बार गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी भाजपा विधायक दल के नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंपी गई है।

सूबे के सियासी गलियारों में फिलहाल यह चर्चा तेज है कि क्या नीतीश कुमार ने भाजपा कि जिद और दवाब में गृह विभाग छोड़ा है? या फिर बड़ी पार्टी होने के बावजूद सीएम की कुर्सी फिर से उन्हे सौंपने के कारण उन्होने भाजपा के प्रति उदारता दिखाई है।

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो इस बार भाजपा और जदयू दोनों बराबरी पर थे। दोनों बराबर-बराबर 101-101सीटों पर चुनाव लड़े थे। इस बार कोई बड़ा या छोटा भाई भाई नहीं,बल्कि दोनों ‘जुड़वा’ भाई की तरह थे। चुनाव परिणाम भी लगभग समान ही आये। भाजपा को 89 और जदयू को 85 सीटें मिली। ऐसे में पुराना महाराष्ट्र माॅडल अपनाया गया जिसमें मुख्यमंत्री शिवसेना के और गृह विभाग भाजपा के उपमुख्यमंत्री के पास रहता था।

दरअसल इस बार  चुनाव से पहले यह चर्चा जोर पकड़ती जा रही थी कि यदि भाजपा को जदयू से ज्यादा सीटें आई तो वह बिहार में भी पिछला महाराष्ट्र मॉडल लागू करेगी। यानी मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। भले ही एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है।

इससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। आखिरकार पहले चरण के मतदान से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  को स्पष्ट करना पड़ा था कि हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं और चुनाव बाद अगर एनडीए की सरकार बनेगी तो नीतीश ही सीएम होंगे।

वैसे भाजपा वाले पिछले कुछ समय से गृह विभाग की मांग कर रहे थे। इसमें दो राय नहीं कि भाजपा कानून-व्यवस्था अपने हाथों में लेकर   सरकार में अपनी भूमिका मजबूती के साथ बढ़ाना चाहती है। यह पार्टी की भविष्य की रणनीति का हिस्सा है। अब जब  विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मिल चुकी है तो यह देखना होगा कि वह राज्य के पुलिस प्रशासन से किस तरह तालमेल बिठाते हैं। उनके लिए यह बड़ी चुनौती होगी।

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