भारत के विमानन सेक्टर को लेकर अदाणी समूह का मेगा प्लान, हवाई अड्डों में करेंगे 1 लाख करोड़ का निवेश

Dayanand Roy
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नई दिल्ली : अदाणी समूह अगले पांच वर्ष में अपने हवाई अड्डों के कारोबार में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रहा है। उद्योगपति गौतम अदाणी के छोटे बेटे एवं अदाणी एयरपोर्ट्स के निदेशक जीत अदाणी ने 25 दिसंबर को नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वाणिज्यिक परिचालन शुरू होने से पहले एक साक्षात्कार में कहा कि हवाई अड्डा क्षेत्र में अगले पांच वर्ष में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अदाणी समूह के बढ़ते हवाई अड्डा खंड में नवीनतम उपलब्धि है। इससे भारत के विमानन बुनियादी ढांचे में इसकी उपस्थिति और मजबूत होगी।

नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एनएमआईएएल) द्वारा विकसित किए जो रहे हवाई अड्डा में अदाणी समूह की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इससे वाणिज्यिक परिचालन 25 दिसंबर से शुरू होगा। अदाणी समूह ने मुंबई हवाई अड्डे को जीवीके समूह से अधिग्रहित किया था। मुंबई के दो हवाई अड्डों के अलावा, अदाणी समूह अहमदाबाद, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम, जयपुर और मंगलुरु में छह अन्य हवाई अड्डों का संचालन करता है। समूह हवाई अड्डों के निजीकरण के अगले दौर के लिए आक्रामक रूप से बोली लगाने की भी योजना बना रहा है।

जीत अदाणी ने कहा कि इस उद्योग में एक दृढ़ विश्वास रखने वाले और आशावादी निवेशक के रूप में हम अगले दौर के सभी 11 (हवाई अड्डों) के लिए बोली लगाने में पूरी तरह आक्रामक रुख अपनाएंगे। रखरखाव, मरम्मत एवं संचालन (एमआरओ) और ‘फ्लाइट सिमुलेशन ट्रेनिंग सेंटर’ (एफएसटीसी) में निवेश के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘ अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि हम अब भी एक दीर्घकालिक रणनीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। उसके बाद ही उसके लिए कोई निश्चित आंकड़ा तय करेंगे। उन्होंने हालांकि कहा कि अंततः, हम इसमें पूरी तरह से शामिल हैं और हम अपनी विशेषज्ञता एवं क्षमता को लगातार बढ़ाना चाहते हैं।

जीत अदाणी ने कहा कि भारत का विमानन क्षेत्र (जिसमें हवाई अड्डे और विमानन कंपनियां शामिल हैं) अगले एक दशक या उससे अधिक समय तक 15-16 प्रतिशत की वृद्धि दर बनाए रख सकता है। भारतीय विमानन उद्योग समग्र रूप से अगले 10-15 वर्ष तक लगातार 15-16 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ सकता है। अगर हम चीन के स्तर तक भी पहुंच जाते हैं, तो इसका मतलब है कि पूरे क्षेत्र को कई गुना अधिक शहरों की दर से विकसित होना होगा। हमारे सामने विकास का एक बेहद लंबा मार्ग है। सभी संकेत यही दर्शाते हैं कि इसे पूरा किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मुंबई हवाई अड्डे पर 2016 से ही सेवाओं की कमी थी और वह आने वाली अतिरिक्त मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं था। नवी मुंबई हवाई अड्डे के शुरू होने के साथ, हमें अंततः इस समस्या से कुछ राहत मिलेगी। भारतीय विमानन के संदर्भ में, यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण है… पहली बात तो यह है कि हम इतने बड़े आकार की संपत्ति को चालू होते हुए देख रहे हैं और दूसरी कि यह यहीं पर नहीं रुकेंगे। अभी इसमें चार गुना वृद्धि की संभावना बाकी है।

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