दुनियाभर में जिस प्रकार महात्मा गांधी को शांति और अहिंसा के प्रतीक के रूप में सम्मान दिया जाता है, उसी प्रकार दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला को भी विशेष सम्मान प्राप्त है। उनकी जयंती 18 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय नेल्सन मंडेला दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर लोगों को शांति, रंगभेद उन्मूलन, गरीबी से लड़ने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रेरित किया जाता है। इस वर्ष इस दिवस की थीम “It’s in Your Hands” रखी गई है।
संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक मान्यता
अंतरराष्ट्रीय नेल्सन मंडेला दिवस को वैश्विक स्तर पर विशेष पहचान प्राप्त है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नवंबर 2009 में इस दिवस को आधिकारिक मान्यता प्रदान की थी। इसके बाद पहली बार 18 जुलाई 2010 को इसे औपचारिक रूप से मनाया गया। तब से हर वर्ष यह दिन नेल्सन मंडेला के विचारों और योगदान को याद करने के लिए मनाया जाता है।
कौन थे नेल्सन मंडेला?
नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को दक्षिण अफ्रीका में हुआ था। उनका बचपन का नाम रोलिहराहला था, लेकिन स्कूल के दिनों में एक शिक्षक ने उन्हें नेल्सन नाम दिया, जिसके बाद वे इसी नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने रंगभेद के खिलाफ लंबा संघर्ष किया और समानता, स्वतंत्रता तथा लोकतंत्र की स्थापना के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इस संघर्ष के दौरान उन्होंने 27 वर्ष जेल में बिताए। वर्ष 1993 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका निधन 5 दिसंबर 2013 को हुआ।
नेल्सन मंडेला से जुड़े रोचक तथ्य
नेल्सन मंडेला 10 मई 1994 को दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने और 1999 तक इस पद पर रहे। वर्ष 1944 में उन्होंने अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (ANC) की सदस्यता ली और यूथ लीग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1952 में उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी कर जोहान्सबर्ग में देश की पहली अश्वेत कानूनी फर्म की स्थापना की। 80 वर्ष की आयु में उन्होंने ग्रेका मचेल से विवाह किया, जो उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा।
