Leptospirosis: मानसून की बारिश गर्मी से राहत तो देती है, लेकिन इसके साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इन्हीं में से एक है लेप्टोस्पायरोसिस, जिसे आम भाषा में रैट फीवर भी कहा जाता है। जलजमाव, बाढ़ और गंदे पानी वाले क्षेत्रों में यह संक्रमण तेजी से फैल सकता है। समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और लिवर, किडनी समेत शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है।
कैसे फैलता है यह संक्रमण?
लेप्टोस्पायरोसिस लेप्टोस्पाइरा नामक बैक्टीरिया से होता है। यह बैक्टीरिया चूहों, गाय-भैंस, कुत्तों और अन्य जानवरों के मूत्र के जरिए पानी और मिट्टी को संक्रमित करता है। जब कोई व्यक्ति गंदे पानी या कीचड़ के संपर्क में आता है, तो त्वचा पर मौजूद कट, घाव, आंख या मुंह के जरिए बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसलिए बारिश के मौसम में विशेष सावधानी जरूरी है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
संक्रमण के 2 से 14 दिनों के भीतर इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। शुरुआत में तेज बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, पिंडलियों और मांसपेशियों में दर्द, आंखों का लाल होना, उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। यदि बीमारी गंभीर हो जाए तो त्वचा और आंखों में पीलिया, किडनी या लिवर संबंधी समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं।
इन आसान उपायों से करें बचाव
बारिश के गंदे पानी और जलजमाव से बचें। यदि ऐसे स्थानों पर जाना जरूरी हो तो वॉटरप्रूफ गमबूट और दस्तानों का उपयोग करें। शरीर पर घाव हो तो उसे वॉटरप्रूफ बैंडेज से ढककर रखें। बाहर से आने के बाद हाथ-पैर साबुन से अच्छी तरह धोएं और घर के आसपास चूहों की संख्या नियंत्रित रखें। यदि गंदे पानी के संपर्क के बाद तेज बुखार या बदन दर्द हो तो इसे सामान्य वायरल समझने की गलती न करें। तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड टेस्ट कराएं, क्योंकि समय पर शुरू किया गया इलाज बीमारी को पूरी तरह ठीक कर सकता है।
