Home » आरयू के कुड़ुख विभाग में एलुमनी मीट को लेकर बैठक, यूजी-पीजी सिलेबस को मिली अंतिम स्वीकृति

आरयू के कुड़ुख विभाग में एलुमनी मीट को लेकर बैठक, यूजी-पीजी सिलेबस को मिली अंतिम स्वीकृति

by Dayanand Roy

रांची : रांची विश्वविद्यालय के कुड़ुख विभाग में शनिवार को एक महत्वपूर्ण विभागीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. बन्दे खलखो ने की। इस अवसर पर कुड़ुख भाषा, साहित्य और अकादमिक गतिविधियों को सशक्त करने से जुड़े कई अहम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।

बैठक में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय के पूर्व समन्वयक एवं कुड़ुख विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. हरि उराँव विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ विभिन्न महाविद्यालयों से आए सहायक प्राध्यापक प्रो. धीरज उराँव, प्रो. प्रेमचंद उराँव, डॉ. अरुण अमित तिग्गा, डॉ. कृति मिंज, प्रो. राधिका उराँव, प्रो. सुमन्ति तिर्की, प्रो. सुषमा मिंज, प्रो. सरिता उराँव तथा प्रो. विकास उराँव ने सक्रिय सहभागिता निभाई। इसके अलावा शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी बैठक में उपस्थित रहे।

बैठक का प्रमुख एजेंडा प्रस्तावित कुड़ुख एलुमनी मीट की तैयारी रहा। विभाग को एलुमनी मीट के लिए अब तक 25 आलेख प्राप्त हो चुके हैं, जिसे उपस्थित शिक्षकों एवं विद्वानों ने उत्साहजनक बताया। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि एलुमनी मीट के लिए पंजीकरण की तिथि 1 फरवरीसे 15 फरवरी 2026 तक निर्धारित की जाए, ताकि अधिक से अधिक पूर्व विद्यार्थी इस आयोजन से जुड़ सकें।

इसके साथ ही बैठक में स्नातक (यूजी) एवं स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर के कुड़ुख पाठ्यक्रम पर विस्तृत चर्चा के बाद उसे अंतिम रूप दे दिया गया। शिक्षकों ने पाठ्यक्रम को समकालीन, शोधोन्मुखी और रोजगारपरक बनाने पर विशेष बल दिया।

बैठक को संबोधित करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. बन्दे खलखो ने कहा कि कुड़ुख भाषा और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और अकादमिक विस्तार के लिए ऐसे सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने एलुमनी मीट को विभाग और समाज के बीच सशक्त सेतु बताते हुए सभी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

कुल मिलाकर यह बैठक कुड़ुख विभाग के शैक्षणिक विकास, पाठ्यक्रमीय सुदृढ़ता और पूर्व विद्यार्थियों से सार्थक संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें सभी शिक्षकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने कुड़ुख भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा अकादमिक विस्तार के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया। एलुमनी मीट के सफल आयोजन के माध्यम से विभाग को नई ऊर्जा, नई दिशा और व्यापक सामाजिक सहभागिता मिलने की उम्मीद जताई गई।

Related Articles

Leave a Comment