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जयराम महतो का आरोप, सांसद ढुल्लू महतो के पास 40000 करोड़ की बेनामी संपत्ति

by Dayanand Roy

सांसद ढुल्लू महतो और विधायक भाई के खिलाफ रिसर्च करना शुरू कर देंगे तो एक एक धागा खोल कर रख देंगे

धनबाद : झारखं‍ड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा प्रमुख और डुमरी के विधायक जयराम महतो ने आरोप लगाया है कि धनबाद से भाजपा सांसद ढुलू महतो के पास 40 हजार करोड़ की बेनामी संपत्ति है। यदि वे रोज तीन करोड़ रुपये भी खर्च करें तो पूरे जीवन सारा पैसा खर्च नहीं कर पाएंगे।

जयराम महतो वृहस्पतिवार को धनबाद में एक मामले में कोर्ट में पेश होने आए थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सांसद की बेनामी संपत्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को जांच कराने का आदेश दिया है। सांसद ढुलू महतो की आयु 50 वर्ष है और उनके पास इतनी बड़ी बेनामी संपत्ति है। मध्य वर्ग का व्यक्ति हर दिन में पांच लाख रुपये भी खर्च करे तो दो हजार साल में भी इतनी राशि खर्च नहीं कर पाएगा।

जयराम महतो ने कहा कि सांसद ढुल्लू महतो को बताना चाहिए कि मुंडेन, खेमका और वृत्ति कंपनी किसकी है। इसकी जांच कराई जाए तो सच सामने आ जाएगा। इसके अलावा जगन्नाथ भठ्ठा, भारत भठ्ठा, राजगंज का भठ्ठा, कतरास के हनुमान मेंशन की ऊपरी तल, उज्जीवन बैंक के सामने की जमीन समेत उत्तर प्रदेश की जमीन कितनी सारी बेनामी संपत्ति हैं, उन्हें सबकी जानकारी है। 

जयराम ने कहा कि गांधीजी के तीन बंदर थे। राजेश, चुन्नु और गंगा ये कौन हैं। सांसद के पास कोई जवाब नहीं होगा। जयराम महतो ने कहा कि वे खुद एक रिसर्चर हैं। वे अगर सांसद और उनके विधायक भाई के खिलाफ रिसर्च करना शुरू कर दें तो एक-एक धागा खोल कर रख देंगे। होश ठिकाने आ जाएगा।

श्री महतो ने कहा कि वे हमेशा से गलत नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। जयराम ने कहा कि धर्म आस्था का विषय है और वे किसी की आस्था को आहत नहीं करते। साधु, पैगंबर या फादर धर्म की बात करें तो बहुत अच्छा लगता है, लेकिन कोई राजनेता धर्म की बात कर रहा है तो वह अवैध कारोबार चला रहा है। ये दोनों भाई कौन से राम भक्त हैं जो अपनी चाची के लिए अपशब्द का प्रयोग करते हैं।

ये कैसा भक्त जो अपनी बेटी के नाम पर शराब का ठेका चला रहा है। रवि महतो नामक मजदूर को बाघमारा विधायक ने 100 बार मां के नाम पर गालियां दी। दोनों भाई अपने अवैध कारोबार को रामजी के नाम की पीछे छुपाने का काम कर रहे हैं। वाल्मीकि और गोस्वामी तुलसीदास ने कौन सी किताब लिखी है, ये बता दें तो भी इन्हें रामभक्त मान लूंगा।

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