मुख्यमंत्री ने सोमवार को झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट दुमका को युवाओं को समर्पित किया
फ्लाइंग इंस्टीट्यूट में पहले चरण में 30 युवाओं को पायलट की ट्रेनिंग दी जायेगी और उसमें से 15 युवाओं पर आनेवाले खर्च का वहन सरकार करेगी
रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट, दुमका को युवाओं को समर्पित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि झारखंड का युवा हवाई जहाज में चढ़ेगा भी और उड़ायेगा भी। उन्होंने कहा कि हमारे विरोधी जो कहते हैं वह करते नहीं हैं। लेकिन हम लोग जो कहते हैं, वह कर के दिखाते हैं। हमने हवाई चप्पल पहनने वाले अपने लोगों को कोरोना के दौरान हवाई जहाज में भी बिठाया और अब यहां का नौजवान हवाई जहाज में भी चढ़ेगा और हवाई जहाज भी उड़ाएगा।

सीएम हेमंत ने कहा कि इस संस्थान में पहले चरण में 30 युवाओं को पायलट की ट्रेनिंग दी जायेगी और उसमें से 15 युवाओं पर आनेवाले खर्च का वहन सरकार करेगी और उसे पायलट बनाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने का काम आपका भाई करेगा। उन्होंने कहा कि इस फ्लाइंग इंस्टीट्यूट की आधारशिला वर्ष 2008 में रखी गई थी। दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने इसकी नींव रखी थी।

लगभग 17 वर्ष पूर्व इस संस्था को स्थापित करने के लिए आधारशिला रखी गयी थी। लेकिन कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव झारखंड में हुए। उस समय विरोधियों की ओर से इस संस्थान को आगे बढ़ाने के बजाय इसको बंद डब्बे में डाल दिया गया। इस संस्थान की आधारशिला रखने के बाद चार-पांच साल के अंदर ही यहां के नौजवानों का भविष्य गढ़ने का कार्य करना चाहिए था।
मगर दुर्भाग्य, कई लोग जो इस राज्य के आदिवासी और मूलवासियों के घोर विरोधी हैं, उन्होंने नहीं चाहा कि यहां के आदिवासी मूलवासियों की आने वाले पीढ़ी शिक्षित हो, वे अपने पैरों पर खड़ा हो सकें। इसलिए ऐसे संस्थानों पर झारखंड के इन विरोधियों ने अंकुश लगाने का प्रयास किया।
पूर्व में झारखंड के हजारों स्कूल को भी बंद करने किया गया। लेकिन आपकी सरकार बनी, अबुआ सरकार बनी और बड़े पैमाने पर नए तरीके से स्कूल बने जो आज उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में अलग पहचान बना रहा है। यह 2008 की योजना थी, उसके बाद देवघर का हवाई अड्डा बनना शुरू हुआ। वह बनकर तैयार भी हो गया वहां हवाई जहाज भी उतरने लगा है।

हमारी कोशिश रही है इस परियोजना को शुरू करने की। यह राज्य बहुत गरीब, पिछड़ा है लेकिन हम अपने सीमित संसाधनों के बावजूद हर चुनौतियों के साथ आगे बढ़ते हैं। बदलाव होगा, बहुत जल्द बदलाव होगा। यह अभी दिखने में छोटा सा प्रयास लग रहा होगा। जब धीरे-धीरे यह पेड़ बड़ा होगा जब आपके गांव से, आपके परिवार से आपका बेटा-बेटी पायलट बनेंगे तब आपको आभास होगा कि इस संस्थान का कितना महत्व है। यहां से आप पढ़ेंगे-लिखेंगे, काबिल बनेंगे तो आप अपने पैरों पर खड़ा होंगे। ऐसे खड़े होंगे कि किसी के सामने आपको हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
रजत जयंती के अवसर पर हमने सोचा कि कहां से लंबी लकीर खींचना शुरू करें! तो लगा संथाल परगना से लकीर खींचना शुरू करते हैं। इस लकीर को हम राजधानी रांची और दिल्ली तक भी लेकर जाने का काम करेंगे।उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारियों को समय सीमा के अंदर कार्य करना होगा, सभी की समय सीमा बनी हुई है। लेकिन उसमें समय सीमा का ध्यान नहीं दिया जाता, जिससे आम लोगों का काम नहीं बनता है। लेकिन अब उस अधिकार, उस कानून के तहत, समय सीमा के अंदर पदाधिकारी कार्य नहीं करेंगे तो वह दंड के भागी बनेंगे।
उन्हें अपनी कार्यशैली बदलनी पड़ेगी।जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे से हमारे पदाधिकारियों के घर के चूल्हे जलते हैं। उनको अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से लेनी होगी और इस काम को, जो जनता की सेवा है, उसे विशेष रूप से कार्यपालिका व्यवस्था को ध्यान में रखना होगा। झारखंड ने 25 वर्ष पूरा किया है, अब हमारी गति और तेजी से होनी चाहिए।
मुझे उम्मीद है कि इस राज्य के नौजवान, किसान, महिला, मजदूर – सभी कदम से कदम मिलाकर तेजी से आगे बढ़ेंगे। आप एक हाथ आगे कीजिए, हम आपको दोनों हाथों से थाम कर आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे।
