
रांची : 40वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा में “ब्लाइंड फोल्डेड रन फॉर विजन” का भव्य आयोजन आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब एवं कश्यप मेमोरियल आई बैंक की ओर से संत जेवियर्स कॉलेज परिसर में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी आंखें कश्यप मेमोरियल आई बैंक को दान करने की घोषणा की।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि जब वह इस दुनिया में न रहें और कश्यप मेमोरियल आई बैंक के लोग उनका कार्निया लेने आएं तो उन्हें न रोका जाए। उन्होंने कार्यक्रम में राज्यवासियों से भी नेत्रदान करने की अपील की। वित्त मंत्री ने कहा कि आप जब इस दुनिया में नहीं रहेंगे, तब आपकी आंखों से कोई इस दुनिया को देखेगा, यह अहसास ही कितना सुखद है।

उन्होंने कहा कि नेत्र दान करने वाले व्यक्ति की जब कॉर्निया ली जाती है तो बाहर से कुछ पता भी नहीं चलता, इसलिए यह बात मन से निकाल देनी चाहिए कि नेत्रदान में पूरी आंखें ही निकाल ली जाती हैं। कार्यक्रम में कश्यप मेमोरियल आई बैंक की डायरेक्टर ने बताया की कश्यप मेमोरियल आई बैंक और आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब के संयुक्त तत्वाधान में हम लोग लगातार सातवीं बार ब्लाइंडफोल्डेड रन फॉर विजन का आयोजन कर रहे हैं। यह 23वां रन फॉर विजन है। यह अपने आप में यूनिक है, अनूठा है। इस तरह का आयोजन देश में किसी भी नेत्रदान जागरूकता से एसोसिएटेड संस्था के द्वारा नहीं किया गया है।
इस लिए भी राज्य के बड़े ट्राइबल लीडर्स जैसे शिबू सोरेन, अर्जुन मुंडा, बाबूलाल मरांडी, महामहिम द्रौपदी मुर्मू जी ने रन फॉर विजन में न केवल भाग लिया है बल्कि शपथ पत्र भर के स्थानीय लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित भी किया है। अब तक हम लोगों ने 1015 नेत्र प्रत्यारोपण किए हैं और पिछले 5 वर्ष में अब तक कुल 490 नेत्र प्रत्यारोपण किए हैं। जिसमें सरकार को इस पर मानव संसाधन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई भी खर्च नहीं उठाना पड़ा है।
मुझे इस बात की खुशी है कि झारखंड बिहार का नेत्र प्रत्यारोपण की शुरुआत का श्रेय हमें प्राप्त है और आज भी झारखंड का सबसे ज्यादा नेत्र प्रत्यारोपण हमारी संस्था द्वारा किया जाता है।
नेत्रदान जागरूकता अभियान बहुत ही जरूरी है क्योंकि हमारे देश में प्रति वर्ष एक करोड़ लोगों की मृत्यु होती है, लेकिन मृत्यु उपरान्त मात्र 50000 कॉर्निया ही हमें मिलते हैं। हमारे देश में 2.5 लाख लोगों को कॉर्निया की जरूरत है और मृत्यु उपरान्त मिले हुए 50000 कनिया में सिर्फ 30000 कार्निया का ही प्रत्यारोपण हो पाता है। सप्लाई वर्सेस डिमांड के बीच का जो गैप है, इसका मुख्य कारण है हमारे समाज में नेत्रदान से जुड़ी गलत अवधारणाएं हैं जो कि बिल्कुल ही निराधार है। हमारे यहां जो कॉर्नियल ब्लाइंडनेस है, इसको कम करने के लिए और आई डोनेशन को बढ़ाने के लिए एक मैटिकुलस सिस्टम और रिसोर्सेज की जरूरत है।
कार्यक्रम के अंत में कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. बिभूति कश्यप ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और उन्होंने कर्यक्रम में मौजूद सभी गणमान्य व्यक्तियों, नेत्रदान करने वाले लोगों के परिजनों एवं कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को आयोजन को सफल बनाने के लिए धन्यवाद कहा।


