बिहार के 7 फीसदी वोटर निभाएंगे अहम भूमिका!
( महेश कुमार सिन्हा)
पटना : विपक्ष के उपराष्ट्रपति प्रत्याशी जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी के कारण इस बार उपराष्ट्रपति का चुनाव अब तक का सबसे रोचक हो गया है। इससे पहले उपराष्ट्रपति चुनाव में लोगों की इतनी दिलचस्पी कभी नहीं देखी गई थी। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति का पद रिक्त है। इसके लिए नौ सितंबर को चुनाव होना है,जिसकी सरगर्मी जोरों पर है।
लोकसभा के 542 और राज्यसभा के 239 यानी कुल 781 सांसद उपराष्ट्रपति चुनने के लिए वोट डालेंगे। बिहार में लोकसभा के 40 और राज्यसभा के 16 सदस्यों को मिलाकर कुल 56 वोटर हैं। इनमें एनडीए के पास 40 और इंडिया गठबंधन पास 16वोटर हैं।इस तरह बिहार के पास इस चुनाव में सात प्रतिशत वोटों की ताकत है जो उपराष्ट्रपति चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इन्ही का समर्थन प्राप्त करने के लिए विपक्ष के प्रत्याशी जस्टिस रेड्डी गुरुवार को पटना आए थे। उन्होने इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ बैठक कर अपने पक्ष में समर्थन की अपील की है। उन्होने एनडीए सांसदों से भी वोट डालने के पहले अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने का आह्वान किया है। जस्टिस रेड्डी ने कहा है कि मैं कभी किसी राजनीतिक दल का सदस्य नहीं रहा,अभी भी नहीं हूं और आगे भी नहीं रहूंगा। उन्होने यह भी कहा कि 1971 में मैंने संविधान को अपने माथे से लगाया था और आज भी वह वही कर रहे हैं। दरअसल,
संसद के दोनों सदनों में एनडीए के घटक दलों की पर्याप्त संख्या होने के बावजूद उपराष्ट्रपति का चुनाव रोचक हो गया है। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने एनडीए प्रत्याशी महाराष्ट्र के राज्यपाल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि वाले सीपी राधाकृष्णन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को उतार कर मुकाबले को तमिल बनाम तेलगू बनाने की भी कोशिश की है।
एनडीए प्रत्याशी राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं जबकि विपक्ष के उम्मीदवार जस्टिस रेड्डी हैदराबाद से हैं और तेलगुभाषी हैं।अमूमन यह देखा गया है कि राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जिस राज्य के होते हैं,उस राज्य की पार्टियां उनका समर्थन करती हैं। एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को प्रत्याशी बनाकर डीएमके और दक्षिण की अन्य पार्टियों पर दबाव बनाने की कोशिश की थी।
विपक्षी गठबंधन ने इसके जवाब में जस्टिस बीएस रेड्डी को उतार कर तेलगू पार्टियों टीडीपी,वाईएसआर कांग्रेस और बीआरएस के लिए चुनौतियां बढ़ा दी है। वह क्षेत्रीय भावनाओं को उभार कर टीडीपी मे भ्रम पैदा करना चाह रहा है। लोकसभा और राज्यसभा में इन दलों के कुल 32 सांसद हैं। बीआरएस ने अभी तक किसी उम्मीदवार का समर्थन करने का फैसला नहीं किया है।
ऐसे में जस्टिस रेड्डी के नाम पर बीआरएस विपक्षी खेमे में शामिल हो सकता है। हालांकि,लोकसभा में उसका कोई सांसद नहीं है। लेकिन राज्यसभा में उसके चार सदस्य हैं। टीडीपी ने एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन को समर्थन देने की घोषणा जरूर की है।लेकिन चंद्रबाबू नायडू दुविधा में हैं। क्योकि जस्टिस रेड्डी से उनका बहुत पुराना और अच्छा संबंध रहा है।
इंडिया गठबंधन ने जस्टिस रेड्डी के जरिए उपराष्ट्रपति चुनाव को वैचारिक लड़ाई के रुप में पेश करते हुए सामाजिक न्याय के एजेंडे को भी आगे बढ़ाया है। हालांकि, जस्टिस रेड्डी उच्च जाति से हैं। लेकिन वे अपने प्रगतिशील और उदारवादी विचारों के लिए जाने जाते हैं। सामाजिक न्याय के मुद्दों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण ही तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने उन्हे अपनी जातिगत सर्वेक्षण समिति का अध्यक्ष बनाया था।जस्टिस रेड्डी ने अपने पटना प्रवास के दौरान बिहार को लोकतंत्र की भूमि बताते हुए कहा है कि यह उस सम्राट अशोक की धरती है,जिन्होने आज से दो हजार साल पहले सामाजिक न्याय देने की शुरुआत की थी।
लेखक न्यूजवाणी बिहार के संपादक हैं।

