श्रावणी मेले में निगरानी के लिए लगाए जा रहे सीसीटीवी कैमरों को लेकर विवाद

Dayanand Roy
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देवघर : देवघर के विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले में निगरानी के लिए लगाए जा रहे सीसीटीवी कैमरों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा किराए पर लिए जा रहे ये कैमरे सब-स्टैंडर्ड क्वालिटी के हैं और केंद्र सरकार के तय सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर टेंडर प्रक्रिया चलाई गई है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि सीसीटीवी किराए पर लेने के लिए जारी किए गए टेंडर से एक बेहद अहम सुरक्षा शर्त एसटीक्यूसी (STQC) सर्टिफिकेशन को ही हटा दिया गया। जानकारों के अनुसार इस लापरवाही से डाटा लीक और साइबर हैकिंग जैसी गंभीर घटनाओं का खतरा पैदा हो सकता है।

दरअसल देवघर जिला प्रशासन ने 15 अप्रैल 2025 को श्रावणी मेले में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों के लिए टेंडर जारी किया था। इस टेंडर में निगरानी के लिए सीसीटीवी सर्वेलांस सिस्टम को किराए पर लेने की बात कही गई थी। लेकिन अब आरोप लग रहा है कि टेंडर में जानबूझकर सुरक्षा से जुड़ा एक जरूरी नियम शामिल नहीं किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधता पर सवाल उठने लगे हैं।

भारत सरकार के दिशानिर्देशों के मुताबिक, देश में उपयोग किए जाने वाले सीसीटीवी कैमरों के लिए Standardization Testing and Quality Certification (STQC) निदेशालय से प्रमाणित होना अनिवार्य है। यह संस्था यह सुनिश्चित करती है कि संबंधित सीसीटीवी सिस्टम सुरक्षा के लिहाज़ से भारत में उपयोग के लिए उपयुक्त है या नहीं।

अगर श्रावणी मेले जैसे बड़े आयोजन में बिना STQC सर्टिफिकेट वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं, तो इससे न केवल नागरिकों की निजता और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, बल्कि यह पूरे टेंडर प्रक्रिया को ही अवैध बना देता है।

फिलहाल यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन इस पर क्या सफाई देता है और क्या कार्रवाई होती है।

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