दिल्ली के मद्रासी कैंप में दशकों पुरानी झुग्गियों को ध्वस्त होते देख निवासी निराश

Dayanand Roy
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नयी दिल्ली/चेन्नई: दक्षिण दिल्ली के जंगपुरा इलाके में स्थित मद्रासी कैंप के निवासी उस वक्त बेहद निराश हो गए जब बुलडोजर शनिवार को उनके इलाके में दाखिल हुए और उन झुग्गियों को गिराना शुरू कर दिया, जिनमें वे कई दशकों से रह रहे थे।

लोगों ने चिंता जताते हुए पूछा ‘अब हम कहां रहेंगे?’

बारापुला के निकट बनी इस झुग्गी बस्ती को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर हटाया जा रहा है।

सड़क किनारे बैठी बुजुर्ग महिला जानकी ने कहा, “मैं पिछले 60 साल से यहां रह रही हूं। मेरे बच्चे यहीं पैदा हुए, यहीं बड़े हुए। हमारी पूरी जिंदगी इसी जगह गुजरी है। अब हम सड़क पर हैं और हमें समझ नहीं आ रहा कि कहां जाएं।”

स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से अपील की है कि जब तक सभी लोगों का पुनर्वास नहीं होता, तब तक किसी को बेघर न किया जाए।

लगभग 370 मजदूर परिवार इस झुग्गी बस्ती में रहते थे, जो लगभग 60 सालों से अस्तित्व में है। पिछले महीने इन्हें बेदखली के नोटिस दिए गए थे। पात्र पाए गए परिवारों को नरेला में सरकार द्वारा आवंटित फ्लैटों में स्थानांतरित किया जाना था।

अधिकारियों ने 12 अप्रैल को पात्र परिवारों की सूची जारी की, जिसमें केवल 189 परिवारों को फ्लैट आवंटित करने योग्य माना गया।

अधिकारियों द्वारा 30 मई को निवासियों को जारी नोटिस में कहा गया था कि शुक्रवार रात 11 बजे से एक जून तक बारापुला पुल पर ट्रक खड़े रहेंगे, ताकि उनका सामान आवंटित फ्लैटों तक पहुंचाया जा सके।

दक्षिण पूर्वी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट अनिल बांका ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेश के तहत की गई है।

इस बीच आम आदमी पार्टी (आप) नेता सौरभ भारद्वाज ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि मद्रासी कैंप में यह अभियान दिल्ली की मुख्यमंत्री के उस आश्वासन के खिलाफ प्रतीत होता है जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी झुग्गी नहीं हटाई जाएगी।

तमिलनाडु सरकार ने रविवार को कहा कि यदि दिल्ली के मद्रासी कैंप में रह रहे राज्य के मूल निवासी अपने गृह जिले में लौटने का विकल्प चुनते हैं, तो उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी।

तमिलनाडु सरकार ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद रविवार से मद्रासी कैंप क्षेत्र में जारी अभियान के कारण वहां के निवासियों के सभी कानूनी विकल्प अब समाप्त हो चुके हैं।

एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि मद्रासी कैंप के वे निवासी जो तमिलनाडु के अपने मूल जिलों में लौटने का विकल्प चुनते हैं, उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी और यह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के आदेशों के अनुरूप है।

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