
नयी दिल्ली : कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के विषय पर मोदी सरकार को घेरने की रणनीति के तहत आगामी पांच जनवरी से देशव्यापी स्तर पर ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ शुरू करने का फैसला किया है तथा उम्मीद जताई है कि इस मुद्दे पर विपक्षी दल एकसाथ खड़े होंगे।

पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि मनरेगा खत्म करने का फैसला सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया और ऐसा करते समय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा कैबिनेट से विचार-विमर्श नहीं किया गया। कांग्रेस की शीर्ष नीति निर्धारण इकाई कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में मनरेगा पर विस्तार से चर्चा हुई और इसमें शामिल 91 नेताओं ने एक बड़ा आंदोलन खड़ा करने की शपथ ली।

कार्य समिति की बैठक से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेक संघ (आरएसएस) की ‘‘संगठन शक्ति’’ की तारीफ कर अपने दल के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी।
हालांकि, उन्होंने बाद में सफाई देते हुए कहा कि वह आरएसएस तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों के धुर विरोधी हैं, और उन्होंने सिर्फ संगठन की तारीफ की है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, महासचिव केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, लोकसभा सदस्य शशि थरूर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा बैठक में मौजूद नहीं थीं।
बैठक में यह फैसला किया गया कि पांच जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ शुरू किया जाएगा। इस अभियान का पूरा कार्यक्रम पार्टी द्वारा अगले एक-दो दिनों में जारी किया जाएगा।
बैठक के बाद खरगे ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘बैठक में यह शपथ ली गई कि मनरेगा योजना को प्रमुख बिंदु बनाकर सारे देश में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। कांग्रेस पांच जनवरी से मनरेगा बचाओ अभियान की शुरूआत करेगी।’’
उनका कहना था कि मनरेगा के विषय पर प्रधानमंत्री मोदी को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
कार्य समिति की बैठक में कांग्रेस नेताओं ने शपथ ली, ‘‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी अग्रणी भूमिका लेते हुए 5 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ शुरू करेगी। हम मनरेगा की हर हाल में रक्षा करेंगे, मनरेगा कोई योजना नहीं, भारत के संविधान से मिला काम का अधिकार है।’’
उन्होंने यह संकल्प भी लिया, ‘‘ग्रामीण मज़दूर के सम्मान, रोज़गार, मज़दूरी और समय पर भुगतान के अधिकार के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेंगे और मांग-आधारित रोज़गार और ग्राम सभा के अधिकार की रक्षा करेंगे।’’


