इंतजार था अध्यक्ष का, मिल गया कार्यकारी अध्यक्ष, रविंद्र राय किए गए किनारे, आदित्य साहू का बढ़ा कद

Dayanand Roy
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सुनील सिंह

झारखंड भाजपा को स्थायी प्रदेश अध्यक्ष के बदले कार्यकारी अध्यक्ष मिल गया। कार्यकर्ता करीब सालभर से अध्यक्ष की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी कार्यकारी अध्यक्ष से ही संतोष करना पड़ेगा। अध्यक्ष के लिए अभी और इंतजार करना होगा। अब बिहार चुनाव के बाद ही फैसला होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष का मामला भी लंबे समय से लटका हुआ है।

केंद्रीय नेतृत्व ने राज्यसभा सांसद आदित्य साहू को रविंद्र राय की जगह कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। बाबूलाल मरांडी अभी अध्यक्ष का दायित्व निभाते रहेंगे। जब कागजों पर प्रदेश में संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, तब अचानक रविंद्र राय को कार्यकारी अध्यक्ष से हटाकर आदित्य साहू को क्यों कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया, फिलहाल इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है।

लेकिन इसकी कोई न कोई वजह तो जरूर है जो देर सवेर सामने आएगी। पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान जब रविंद्र राय की नाराजगी की खबरें आई तो उन्हें मनाने के लिए तत्काल कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया था। अब जब अध्यक्ष की नियुक्ति की घोषणा होनी है तब ऐसे में रविंद्र राय को क्यों हटाया गया यह बड़ा सवाल है?

विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही थी कि पार्टी अब हार से सबक लेते हुए संगठन में बड़ा फेरबदल करेगी। लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका पार्टी अनिर्णय की स्थिति में है।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जब ओडिशा के राज्यपाल का पद त्याग कर सक्रिय राजनीति में झारखंड लौटे तो ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही थी कि उन्हें कोई बड़ा दायित्व दिया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। लेकिन इस पर भी कोई फैसला नहीं हुआ। रघुवर दास को कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई। नई जिम्मेदारी की उम्मीद लगाए रघुवर दास ने राजपाल का पद भी छोड़ दिया और इधर भी कोई फैसला नहीं हुआ।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में जो जड़ता आई थी वह अब तक कायम है। अभी तक मंडल अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका है। यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है।

बहरहाल पार्टी ने राज्यसभा सांसद आदित्य साहू को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी है। आदित्य साहू का नाम प्रदेश अध्यक्ष के लिए भी चल रहा था।

वर्तमान में महासचिव हैं और प्रदेश भाजपा का अधिकांश कार्यभार यही संभालते हैं। संगठन का लंबा अनुभव है। रघुवर दास सहित पार्टी के बड़े नेताओं से अच्छे संबंध हैं। ओबीसी समुदाय से आते हैं। झारखंड में अब भाजपा ओबीसी समाज पर ही फोकस कर रही है। आदित्य साहू इसके उदाहरण हैं।

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