Home Bihar सरकारी डाक्टरों की निजी प्रैक्टिस बंद होगी : नीतीश कुमार

सरकारी डाक्टरों की निजी प्रैक्टिस बंद होगी : नीतीश कुमार

by Dayanand Roy

चनपटिया चीनी मिल जल्द चालू होगी

बेतिया : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को पश्चिम चंपारण के बेतिया से अपनी समृद्धि यात्रा की शुरुआत  की। उन्होंने जिला मुख्यालय कुमारबाग पहुंचकर पहले  विकास कार्यों की गहन समीक्षा की।

फिर जीविका दीदियों से रू-ब-रू होकर संवाद किया। इसके बाद रमना मैदान में  जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक के बाद एक बड़े ऐलान किए। अपने करीब 34 मिनट के भाषण में उन्होंने  ऐलान किया कि अब बिहार के सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। इसके लिए सरकार नई नीति लाने जा रही है।

उन्होंने कहा कि इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। मुख्यमंत्री  ने कहा कि इससे मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा। स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा साफ है कि गरीब और आम आदमी को बेहतर इलाज मिले।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार के सहयोग को बिहार के विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार को योजनाओं की सौगात दी और उनके क्रियान्वयन में कोई कमी नहीं छोड़ी। बजट में बिहार को तरजीह मिल रही है, गरीबों के लिए घर बन रहे हैं, मुफ्त अनाज दिया जा रहा है और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की योजनाएं चलाई जा रही हैं।

उन्होंने दावा किया कि अगले पांच सालों में सरकार एक करोड़ नौकरी और रोजगार का सृजन करेगी। उद्योगों पर बोलते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में औद्योगिक विकास के लिए सरकार पूरी तरह संजीदा है। बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू करने का काम शुरू हो गया है। चनपटिया चीनी मिल जल्द शुरू होगी, जिससे किसानों को बाजार और युवाओं को रोजगार मिलेगा।

हर जिले में उद्योग लगाने की दिशा में पहल हो रही है। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक तरफ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की सराहना की, तो दूसरी तरफ लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा सियासी वार किया। उन्होंने कहा कि नवंबर 2005 में जब बिहार में एनडीए की सरकार बनी, उससे पहले की सरकारों ने जनता की भलाई के लिए कोई ठोस काम नहीं किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आरोप लगाया कि मुसलमानों के वोट तो लिए गए, लेकिन उनके हक और विकास के लिए कुछ नहीं किया गया।

उस दौर में हिंदू-मुसलमान के बीच तनाव आम बात थी। लेकिन एनडीए सरकार आने के बाद सामाजिक सौहार्द कायम हुआ और झगड़े-फसाद पर लगाम लगी। समृद्धि यात्रा के पहले ही दिन नीतीश कुमार ने साफ कर दिया कि यह सफर सिर्फ योजनाओं की समीक्षा नहीं, बल्कि विकसित और आत्मनिर्भर बिहार की सियासी और प्रशासनिक घोषणा है। उन्होंने कहा कि पहले हालात इतने खराब थे कि लोग शाम के बाद घर से बाहर निकलने से डरते थे. समाज में विवाद होते थे। हिंदू-मुस्लिम झगड़े आम थे. पढ़ाई, इलाज, सड़क और बिजली की हालत बेहद खराब थी।

नीतीश कुमार ने कहा कि 24 नवंबर 2005 को एनडीए सरकार बनने के बाद से बिहार में कानून का राज स्थापित हुआ। विकास की रफ्तार बढ़ी। सड़कें बनीं। बिजली गांव-गांव पहुंची। शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार हुआ। आज कोई सांप्रदायिक तनाव नहीं है। उन्होंने कहा कि 2020 में 10 लाख नौकरी और 10 लाख रोजगार का वादा किया गया था। 10 लाख नौकरी दी जा चुकी है।

40 से 50 लाख लोगों को रोजगार मिला है। अब लक्ष्य है अगले 5 साल में एक करोड़ युवाओं को रोजगार देना। मुख्यमंत्री ने बताया कि 2006 में पंचायतों में 50 फीसदी आरक्षण, 2013 में पुलिस में 35 फीसदी और 2016 में सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 फीसदी आरक्षण दिया गया। बिहार पुलिस में महिलाओं की संख्या देश में सबसे ज्यादा है। ‘जीविका’ समूह से आज 1 करोड़ 40 लाख महिलाएं जुड़ी हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बेतिया जिले के लिए 182 करोड़ रुपये की 161 विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया। ‘समृद्धि यात्रा’ के मंच पर दोनों उपमुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। वहीं, यात्रा के दौरान विरोध की आशंका के बीच माले के युवा नेता फरहान राजा की गिरफ्तारी भी चर्चा में रही। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री बेतिया से पटना लौट गए। शनिवार को वे मोतिहारी जाएंगे।

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