जमशेदपुर मुद्रा उत्सव का समापन, लोकप्रियता इतनी की भीड़ के दबाव में बंद करने पड़े कई प्रवेश द्वार

Dayanand Roy
3 Min Read

जमशेदपुर : तीन दिनों तक ज्ञान, इतिहास और विरासत का उत्सव बना रहा जमशेदपुर मुद्रा उत्सव 2026 रविवार को भव्य रूप से संपन्न हो गया। साकची स्ट्रेट माइल रोड स्थित सिक्का संग्रहालय में इस अनूठे आयोजन ने साबित कर दिया कि जमशेदपुर केवल औद्योगिक नगरी ही नहीं, बल्कि इतिहास और बौद्धिक जिज्ञासा का केंद्र भी है। मुद्रा उत्सव की खासियत ये रही कि इसमें ब्रिटिश काल से लेकर रिपब्लिक इंडिया के सिक्कों की प्रदर्शनी लगायी गयी थी।

मुद्राओं की दुनिया से रूबरू होने के लिए जमशेदपुर ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हालात यह रहे कि भीड़ के दबाव में कई बार प्रवेश द्वार बंद करने पड़े, जो आयोजन की लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण बन गया।

उत्सव में पहुंचे लोगों ने प्राचीन, ऐतिहासिक और दुर्लभ सिक्कों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग में इतिहास को जानने की उत्सुकता साफ झलक रही थी। दर्शकों का कहना था कि यह आयोजन केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ज्ञानवर्धन का जीवंत मंच बना।

जमशेदपुर कॉइन समिति के महासचिव प्रेम पीयूष कुमार ने अपनी गहन जानकारी और सरल संवाद शैली से लोगों को मुद्राओं के इतिहास, उनकी पहचान और महत्व से अवगत कराया।उनकी बातों ने न सिर्फ श्रोताओं का ज्ञान बढ़ाया, बल्कि सिक्कों के प्रति नई सोच और सम्मान भी पैदा किया।

प्रदर्शनी में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं, आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रमुख सदस्यों को भी मंच से विशेष सम्मान प्रदान किया गया।

आयोजकों की ओर से जमशेदपुरवासियों से अपील की गई कि वे जमशेदपुर कॉइन म्यूजियम को समृद्ध बनाने के लिए दान दें,म्यूजियम के लिए फंडिंग में सहयोग करें और जमशेदपुर कॉइन क्लब से जुड़कर इस ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा बनें। फंडिंग या सदस्यता से संबंधित इच्छुक लोग सीधे प्रेम पीयूष कुमार से संपर्क कर सकते हैं।

इस कॉइन एग्जिबिशन की सबसे खास बात यह है कि इसमें भारत के हर कोने से सिक्का संग्रहकर्ता (कॉइन कलेक्टर्स) हिस्सा लेने पहुंचे थे। उत्तर भारत, दक्षिण भारत, पूर्व और पश्चिम भारत से आए संग्रहकर्ताओं ने अपने पास मौजूद दुर्लभ और ऐतिहासिक सिक्कों को प्रदर्शनी में सजाया था। किसी के पास प्राचीन राजाओं के समय के सिक्के हैं तो किसी के पास मुगल काल, ब्रिटिश शासन और आज़ाद भारत के शुरुआती दौर के सिक्के थे।जमशेदपुर मुद्रा उत्सव 2026 ने यह साफ कर दिया कि यह आयोजन केवल तीन दिनों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ज्ञान, इतिहास और संस्कृति को संजोने की एक मजबूत पहल है। आने वाले वर्षों में यह उत्सव और भी व्यापक रूप लेगा—ऐसी उम्मीद के साथ इसका समापन हुआ।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *