राष्ट्रीय एकता, संस्कृति और संवाद की सशक्त भाषा है हिन्दी: प्रवीण टोप्पो

Dayanand Roy
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हिंदी भाषा को तकनीकी और डिजिटल युग के अनुरूप बनाना हमारी प्राथमिकता

रांची : हिंदी हमारी राष्ट्रीय एकता, संस्कृति और संवाद की सशक्त भाषा है। उन्होंने कहा कि हिंदी ने प्रशासनिक कार्यों को सरल और जनसामान्य तक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रविवार को ये बातें कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो ने कहीं। वे श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान में हिन्दी दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि हिंदी ने प्रशासनिक कार्यों को सरल और जनसामान्य तक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हिंदी भाषा को और अधिक सरल, सहज तथा समृद्ध बनाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन, प्रशासनिक कार्यों तथा तकनीकी क्षेत्रों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देकर इसे और व्यापक बनाया जा सकता है।

उन्होंने रेखांकित किया कि मातृभाषा के रूप में हिंदी हमारी सांस्कृतिक पहचान है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक सशक्त रूप से पहुँचाना हम सबकी जिम्मेवारी है। उन्होंने कहा आगे कहा कि हमारे विभाग की ओर से भारत सरकार के साथ होने वाला पत्राचार भी हिंदी में ही किया जाता है, जिससे हिंदी का प्रयोग न केवल राज्य स्तर पर बल्कि केंद्र स्तर पर भी और सशक्त रूप से स्थापित हो रहा है।

हिंदी के प्रचार-प्रसार में अग्रसर झारखंड सरकार

श्री टोप्पो ने कहा कि झारखंड सरकार कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और इसके प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों के जरिए हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। हाल ही में साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित लेखिका और  हिंदी विभाग (राम लखन सिंह यादव कॉलेज) की सहायक प्राध्यापक, डॉ. पार्वती तिर्की ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी भाषा की गहराई तक जाना आवश्यक है।

हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर भी है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। समारोह में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी हिंदी को तकनीकी युग के अनुरूप बनाने, बिज़नेस, मैनेजमेंट, मेडिकल, इंजीनियरिंग, ई-गवर्नेंस और डिजिटल प्लेटफार्मों पर इसके अधिकाधिक प्रयोग तथा विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा तक हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।

इस अवसर पर कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग द्वारा निबंध प्रतियोगिता एवं लघु कथा प्रतियोगिता के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय विजेताओं को सम्मानित किया गया।

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