
कोर्ट ने कहा-लालू यादव और उनके परिवार ने ‘ आपराधिक गिरोह ‘ की तरह काम किया

पटना : रेलवे में नौकरी के बदले जमीन मामले में शुक्रवार को लालू परिवार को बड़ा कानूनी झटका लगा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की चार्जशीट पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष पेश सबूत सही पाए जाने पर लालू परिवार समेत 41 लोगों पर आरोप तय कर दिए गए।
कोर्ट ने सभी 41 आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 13 (2) और 13 (1) (डी) के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही 52 लोगों को बरी भी किया गया है। ऐसे में अब लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
जिन लोगों पर आरोप तय किए गए हैं उनमें राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी,बेटे तेज प्रताप यादव व तेजस्वी यादव, बेटी मीसा और हेमा शामिल हैं।
यह मामला सीबीआई की तरफ से दर्ज किया गया है। सीबीआई ने अदालत को सूचित किया कि मूल चार्जशीट में 103 नाम थे, जिनमें से 5 की मृत्यु हो चुकी है। अब कोर्ट में ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी। अभियोजन पक्ष (सीबीआई) को अब कोर्ट के सामने अपने गवाहों को बुलाकर उनके बयान दर्ज कराने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को मुकर्रर की गई है।
सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि इस मामले में आगे सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अब अगली प्रक्रिया के तहत ट्रायल शुरू किया जाएगा और आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश किए जाएंगे। सुनवाई के दौरान विशेष अदालत के जज विशाल गोगने ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य बताते हैं कि लालू यादव और उनके परिवार ने एक ‘आपराधिक गिरोह ’ की तरह काम किया।
कोर्ट ने माना कि आरोपियों के बीच एक व्यापक आपराधिक साजिश के पर्याप्त संकेत मिलते हैं। इसके बाद जज की तरफ से आदेश दिया गया कि लालू यादव ने अपने परिवार के लिए अचल संपत्ति पाने के लिए सरकारी नौकरी की सौदेबाजी की। इसे ही हथियार बनाते हुए बड़ी साजिश रची गई, लालू यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला चलाने का पर्याप्त आधार पाया गया है। उल्लेखनीय है कि इस फैसले के साथ ही उस पूरे खेल की परतें फिर से खुलने लगी हैं, जिसमें कथित तौर पर रेलवे की ग्रुप-डी नौकरियों के बदले बिहार में कीमती जमीनें कौड़ियों के भाव लालू परिवार के नाम कराई गईं।
यह घोटाला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। सीबीआई का आरोप है कि उस दौरान रेलवे के विभिन्न जोनों (मुख्यतः जबलपुर जोन) में ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्तियां की गईं। इन नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से पटना और आसपास के इलाकों में प्राइम लोकेशन की जमीनें लिखवाई गईं।
आरोप है कि लगभग 1 लाख स्क्वायर फीट जमीन सिर्फ 26 लाख रुपये में हासिल की गई, जबकि उस समय उसका बाजार मूल्य 4.39 करोड़ रुपये से अधिक था। कई जमीनों को लालू परिवार के सदस्यों या उनके नियंत्रण वाली कंपनियों के नाम पर ‘गिफ्ट’ के रूप में ट्रांसफर कराया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इन भर्तियों के लिए न तो कोई सार्वजनिक विज्ञापन निकाला गया और न ही उचित प्रक्रिया का पालन किया गया।
गौरतलब है कि मई 2022 में सीबीआई ने लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती और अन्य परिजनों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद पिछले साल अगस्त में फिर से छापे पड़े। जांच के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया।


