ताजमहल को शाहजहां और मुमताज महल के अमर प्रेम का प्रतीक माना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मुमताज महल की अंतिम यात्रा का महत्वपूर्ण अध्याय मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1631 में मुमताज महल का निधन बुरहानपुर में अपने 14वें बच्चे को जन्म देते समय हुआ था।
अहुखाना में किया गया था पहला दफन
मुमताज महल की मृत्यु के बाद उन्हें बुरहानपुर के अहुखाना में लगभग छह महीने तक दफन रखा गया था। बाद में उनके पार्थिव शरीर को आगरा ले जाया गया, जहां उनके सम्मान में विश्व प्रसिद्ध ताजमहल का निर्माण कराया गया।
इतिहासकारों के अनुसार, शाहजहां ने शुरुआत में मुमताज का स्थायी मकबरा बुरहानपुर में ही बनाने पर विचार किया था। हालांकि भूमि और निर्माण संबंधी परिस्थितियां अनुकूल न होने के कारण अंततः आगरा को चुना गया।
शाही किला और हमाम आज भी हैं आकर्षण
बुरहानपुर के शाही किले में स्थित मुमताज महल का प्रसिद्ध शाही स्नानागार (हमाम) आज भी इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करता है। इसके अलावा जैनाबाद स्थित अहुखाना और पाइबाग भी पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण स्थल हैं।
मुगल इतिहास का अहम केंद्र
बुरहानपुर को मुगलों के दक्षिण भारत के प्रमुख प्रशासनिक और सैन्य केंद्रों में गिना जाता है। यहां आज भी मुगलकालीन किले, बाग, मकबरे और उन्नत जल-प्रबंधन प्रणाली के अवशेष मौजूद हैं, जो इस शहर की ऐतिहासिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं।
