पिपरवार की अशोक विहार कालोनी में पीसीसी रोड से उड़ रही धूल से लोग परेशान

Dayanand Roy
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कालोनी वासियों ने की घटिया निर्माण की उच्च स्तरीय जांच की मांग

 

पिपरवार : कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी सीसीएल पिपरवार क्षेत्र के आवासीय कालोनी अशोक विहार को सुसज्जित करने के उद्देश्य से कंपनी ने एक करोड़ से अधिक की लागत से रोड बनवाई, लेकिन रोड बनने के बाद से कालोनी वासी परेशान हैं।रोड की पीसीसी ढलाई में इतनी घटिया किस्म की छाइ रूपी सीमेंट से ढलाई किया गया है कि रोड से सफेद रंग का धूल उड़ रहा है।

कालोनी के लोग परेशान हैं । रोड से उड़ने वाला धूल उनके बेडरूम तक पहुंच रहा है। इस खामियां को छुपाने के लिए विभागीय अधिकारी और संवेदक रोड पर रोजाना झाड़ू लगवा रहे है ताकि किसी प्रकार से लीपा-पोती किया जा सके।

अशोक विहार कालोनी के रोड बनने से लेकर बनने के बाद तक विबाद का गहरा नाता रहा है। कालोनी के लोग रोड बनने के समय भी कार्य की शैली और गुणवत्ता पर प्रश्न खड़ा किये थे। साथ ही मिटींग कर विरोध किया था कि पुरानी सड़क को खोद कर मलबा हटाकर रोड बनाई जाय ताकि कालोनी के क्वार्टरों में रोड का पानी नहीं घुसे लेकिन कांलोनी के लोगों का एक भी नहीं सुना गया और नजर अंदाज करते हुए सीविल विभाग के अधिकारी और संवेदक मिलकर दिन के बजाय रात को सड़क की ढलाई कराई गई।

जितना ऊंचा रोड़ ढालना था उतना ढलाई भी नहीं हुआ लोगों के घरों में पानी घुसने लगा। इन सभी समस्या को कालोनी के लोग बर्दाश्त तो किया लेकिन हद तब हो गया जब सड़क से धूल उड़ना शुरू हो गया और रोड़ से कंक्रीट बाहर आने लगा। किसी कार्य की लीपापोती की हद होती है। पीसीसी रोड़ की कार्य की गुणवत्ता में तो चोरी हुई है जहां 6 इंच मोटा ढलाई करना था वहां एक इंच ,डेढ़ इंच दो इंच ढलाई किया गया उसमें भी घटिया क्वालिटी की छाय रूपी सीमेंट से रोड को ढालाई किया गया जो  प्रबंधन और कॉलोनी के लोगों के लिए सर दर्द बन गया हैं।

सिविल विभाग के अधिकारी इस मामले को कैसे निपटाया जाए इस मामले को रणनीति तैयार कर रहे है। लेकिन धूल उड़ने के कारण कॉलोनी के लोगों में आक्रोश है। सीविल अधिकारीयों का टीम कालोनी का निरीक्षण कर  लीपापोती करने में लगे हुए हैं। इस सड़क के घटिया निर्माण कार्य में जितना जिम्मेवार संवेदक है उससे कई गुणा जिम्मेवार सीविल के अधिकारी हैं।

जब रोड में पीसीसी क्या जा रहा था तक सीविल के अधिकारी कहा थे।इससे साफ जाहिर होता है कि कार्य स्थलों पर सीविल के अधिकारी की निगरानी नहीं रहती है। यह जांच की विषय है और गहरी जांच की जरूरत है।  यहां तक पता चला है कांलोनी वासियों के दबाव के वजह से सीविल विभाग के वरीय अधिकारी कनिष्ठ अधिकारी को  उक्त संवेदक का बिल रोकने के आदेश दिया है।

वहीं कहा जा रहा है कि अधिकारी पहले इसकी समस्या का समाधान  चाहते हैं।

समस्या का समाधान करने के लिए सड़कों में झाड़ू लगाई जा रही और पानी छिड़काव किया जा रहा है ताकि  सीमेंट का धूल क्वार्टरों में नहीं घुसे।उसके बाद मामला शांत होते ही लीपा-पोती करने की योजना है लेकिन ऐसा होने वाला नहीं है यहां तक कहां जा रहा है कि कौन से साइंस पढ़कर सीविल विभाग के अधिकारी आते हैं जो सड़क बनाने के तरीके मालूम नहीं है। कॉलोनी के लोगों ने बताया कि शुरू से एस्टीमीट बनाने से लेकर कार्य को लेने तक सेटिंग चला है और कार्य को अंजाम देने में भी सेटिंग किया गया था ताकि अधिकारी और संवेदक पैसे को बंदरबांट कर सके और वैसा ही हुआ है। पीसीसी सड़क  में लीपा-पोती किया गया लेकिन पोल तब खुला जब कॉलोनी में धूल उड़ने लगा।

अगर ऐसा नहीं होता तो शायद  संवेदक को बील का भुगतान हो गया होता। लेकिन कालोनी के लोगों के लगातार विरोध करने की वजह से बील भुगतान नहीं हो पाया। कहां जाए तो तकनीकी रूप से मामला फंस चुका है। अशोक विहार कालोनी में एक करोड़ से अधिक की लागत से बने रोड की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए।

कहां पर गड़बड़ी की गई है आखिर कंपनी को रसातल  में ले जाने के लिए एसे संवेदक और अधिकारी को जिम्मेदारी क्यो सौंपी जा रही है। लोगों ने कहा कि एस्टीमीट लागत से नौ प्रतिशत अधिक पर ठेका लिया गया है।

और शुरू से रोड निर्माण कार्य में सेंटीग चल रहा था। यहां तक बताया गया कि कई संवेदक इसी कार्य को कम लागत में कार्य करने के निविदा डाला था लेकिन सीविल विभाग ने उक्त संवेदक को कार्य देने के लिए कई संवेदक से समझौता कर एल वन हुआ और चहेते ठेकेदार को उक्त कार्य दिया गया जिसका परिणाम अभी देखने को सामने आया है।

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