
रांची : मारवाड़ी कॉलेज में गुरूवार को खोरठा दिवस सह श्रीनिवास पानूरी जयंती पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों की ओर से श्रीनिवास पानूरी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।

इसके बाद मारवाड़ी कॉलेज के खोरठा भाषा विभाग के सहायक प्राध्यापक सह ए.एन.ओ.(एन.सी.सी.) लेफ्टिनेंट डॉ. अवध बिहारी महतो ने सभी अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति-पत्र देकर किया। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में कहा कि खोरठा दिवस श्रीनिवास पानूरी का जन्मदिन है और उनके योगदान की देन है। खोरठा के लिए उनके प्रयास को भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने सिर्फ खोरठा साहित्य की रचना ही नहीं की बल्कि, खोरठा भाषा को आगे ले जाने का कार्य भी किया। उनके जन्म दिवस पर हम यह दिवस तो मनाते ही हैं, यह दिवस आज क्रिसमस डे, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपाई, तुलसी पूजन और झारखंड के आंदोलनकारी शहीद निर्मल महतो की भी याद कराती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. विनोद कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि खोरठा भाषा के विकास में श्रीनिवास पानूरी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता । आज जो हम खोरठा भाषा दिवस की भव्यता देख रहे हैं, यह उनकी ही देन है।
उन्होंने अपने भाषा के विकास में गरीबी को कभी आड़े नहीं आने दिया और संघर्ष कर अपने भाषा साहित्य के लिए कार्य किया। एक पान-गुमटी में पान बेचते हुए खोरठा साहित्य सृजन किया जाना उनकी उपलब्धि थी । उन्होंने लोगों को प्रेरित भी किया कि अगर आप चाह लें तो कोई भी काम आसान नहीं । स्वर्गीय बिनोद बिहारी महतो जी का संगत भी उन्हें साहित्य रचना की ओर अग्रसित किया ।
आप भी अपने मातृभाषा में साहित्य की रचना करें और इसे आगे ले जाएं। हमारी शुभकामना आपके साथ है । वहीं, मेजर डॉ. महेश्वर सारंगी ने कहा कि सभी को अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए। संघर्ष करना चाहिए और भाषा को आगे ले जाकर अपनी संस्कृति को बचाना चाहिए। डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि खोरठा भाषा को संरक्षित और संवर्धित करने की आवश्यकता है।
इसके लिए मासिक अथवा त्रैमासिक बैठक होना चाहिए ताकि, हम सब खोरठाभाषी खोरठा भाषा को और आगे ले जाने पर विचार और मंथन करते रह सकें । डॉ. राहुल कुमार ने कहा कि अपने मातृभाषा के प्रयोग में संकोच नहीं करना चाहिए। मुझे गर्व है कि मेरी मातृभाषा खोरठा है और इसका प्रयोग मैं हमेशा करता हूं। आप भी अपनी मातृभाषा का प्रयोग अवश्य करें। उन्होंने रामचरितमानस का जिक्र किया जो अवधि भाषा में लिखा गया है ।
जिसे फादर कामिल बुल्के अपने साथ ले जाना चाहते थे । डॉ. राजेंद्र कुमार महतो ने कहा कि खोरठा भाषा को आईटी से जोड़कर लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए ताकि वर्तमान समय की मांग को हमारी मातृभाषा खोरठा भी पूरा कर सके। जब हम आईटी से जोड़कर अपने भाषा का प्रचार करेंगे तो हमारा भाषा वर्तमान के मांग को पूरा करते हुए रोजगार भी देगा । डॉ. निरंजन कुमार द्वारा कहा गया कि अगर हम खोरठा दिवस मनाने के लिए मारवाड़ी महाविद्यालय में एकत्रित हुए हैं तो, इसमें हमारे अग्रज लेफ्टिनेंट डॉ. अवध बिहारी महतो जी का काफी योगदान है । इनके योगदान को हम इसलिए भी बतलाना चाहते हैं कि ये जब इस विभाग से नहीं जुड़े थे तब भी इनका सहयोग और सहभागिता मिलता रहा था । श्री निवास पानूरी जी के लगाए गए पेड़ को ऐसे लोगों ने सींचने का कार्य किया है । हम आज खोरठा दिवस मना रहे हैं तो हमारे अन्य खोरठा विद्वानों की चर्चा भी होनी चाहिए । खोरठा भाषा विद्वान ए.के. झा, भुवनेश्वर दत शर्मा ‘व्याकुल’ जैसे विद्वानों को भुलाया नहीं जा सकता ।
सभी खोरठा भाषा विद्वान का सम्मान हो और खोरठा भाषा आप सबकी मदद से आगे बढ़े ऐसी हमारी आकांक्षा है । श्री महादेव प्रसाद ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि खोरठा हमारी मातृभाषा ही नहीं, झारखंड की द्वितीय राजभाषा भी बन चुकी है । हम अपनी भाषा में बात करें, इसे एआई से जोड़कर उसका विकास करें, तो आनेवाले समय में खोरठा अपने उच्चतम स्तर को प्राप्त कर रोज़गार सृजन अवश्य करेगा। कार्यक्रम का संचालन मारवाड़ी महाविद्यालय, रांची के खोरठा भाषा सहायक प्राध्यापक डॉ. अमित कुमार के द्वारा किया गया।
उन्होंने खोरठा भाषा के प्रति उपस्थित गणमान्य लोगों एवं छात्र-छात्राओं को प्रेरित और प्रोत्साहित भी किया । खोरठा का विकास हम सबके प्रयास से ही संभव है । आप अपने विषय के साथ अपनी मातृभाषा का प्रयोग अवश्य करें । कार्यक्रम के दौरान इस वर्ष से भुनेश्वरदत शर्मा ‘व्याकुल’ साहित्य सेवा सम्मान की शुरुआत करने की घोषणा की गई । 2025 के लिए यह सम्मान खोरठा भाषा विद्वान डॉ. विनोद कुमार को प्रदान किए जाने की घोषणा की गई ।इस कार्यक्रम में मारवाड़ी महाविद्यालय, रांच के छात्र-छात्राओं के साथ एन.सी.सी. के कैडेटों ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
कैडेट शनि विश्वकर्मा, कैडेट प्रदीप कुमार, कैडेट पंकज तिर्की, कैडेट राहुल पंडित, कैडेट श्रवण कुमार सिंह कैडेट लक्ष्य सिन्हा, मारवाड़ी महाविद्यालय में खोरठा विषय स्नातक के छात्र सत्यम दीवान, स्नातकोत्तर छात्र कमलेश कुमार महतो, शोधार्थी धर्मेंद्र कुमार, शोधार्थी उर्मिला कुमारी आदि ने भी इस दिन की महता पर खोरठा में प्रकाश डाला और इस दिन की महत्ता बतायी। सन्नी कुमार विश्वकर्मा द्वारा खोरठा के महत्व, संरक्षण और संवर्धन के लिए एक गीत प्रस्तुत किया गया।



