हिजाब प्रकरण कोई विवाद है ही नहीं : आरिफ मोहम्मद खान

Dayanand Roy
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पटना : हिजाब विवाद के बाद सुर्खियों मे आयी मुस्लिम महिला डॉक्टर नुसरत परवीन शनिवार को ज्वाइन नहीं की। उन्हे शनिवार शाम  6 बजे तक पटना सदर के संबलपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र  में योगदान देना था।

लेकिन वह ज्वाइन करने नहीं पहुंची। इस बीच हिजाब प्रकरण को लेकर गहराते विवाद पर बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शनिवार को कहा कि यह कोई विवाद ही नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिता की तरह हैं और इसे विवाद कहना दुखद है।

राज्यपाल ने कहा कि इस घटना को पिता-बेटी के रिश्ते की तरह देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक विवाद के रूप में। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं होना चाहिए था, वो बेटी है और बाप-बेटी के मामले को विवाद कहना ही गलत है।

राज्यपाल ने कहा कि वे मुख्यमंत्री का बचाव नहीं कर रहे हैं, लेकिन उन्हें दुख है कि इस घटना को लेकर इतना बड़ा विवाद खड़ा किया जा रहा है। दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे पटना में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब हटाते नजर आ रहे हैं। यह घटना  15 दिसंबर को नियुक्ति पत्र वितरण समारोह की है, जहां महिला अपना नियुक्ति पत्र ले रही थी। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार ने कथित तौर पर महिला का चेहरा देखने के लिए हिजाब नीचे किया, जिससे महिला असहज दिखी। वीडियो में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी उन्हें रोकने की कोशिश करते दिखे।

इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है, विपक्ष ने इसे घिनौना काम बताते हुए नीतीश की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए। लेकिन, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नजरिये को लेकर उठाए जा रहे सवाल पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। उधर, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने बिहार की महिला चिकित्सक डॉ. नुसरत परवीन को झारखंड में सरकारी नौकरी का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने डॉ. नुसरत को तीन लाख रुपये वेतन, मनचाही पोस्टिंग और सरकारी आवास देने की बात कही है।

इरफान अंसारी ने कहा कि झारखंड में चिकित्सकों का सम्मान होता है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। झारखंड सरकार अनुबंध पर चिकित्सकों की नियुक्ति करती है, जिसमें उन्हें अच्छा वेतन और सुविधाएं मिलती हैं।

उनके इस बयान पर बिहार सरकार के मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि सब कोई कहीं भी जा सकता है। कोई झारखंड जाए, कोई कर्नाटक जाए, कोई जम्मू कश्मीर जाए, धारा 370 खत्म हो चुका है। सबकी अपनी इच्छा है बिहार में पूरी तरह कानून का राज है, सबका सम्मान है। इस तरह की चीजों पर राजनीति करने वाले लोग देश हित और समाज हित में कभी भी काम नहीं करते हैं। समाज को बांटने और काटने का षड्यंत्र है और कुछ नहीं।

वहीं, जदयू के मुख्य प्रवक्ता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री पर  तंज कसते हुए कहा कि आप सुबह-सुबह झूठ बोलते हैं। डॉक्टरों की नियुक्ति में आपका कोई योगदान झारखंड में नहीं है। आप बिहार की बेटी को तीन लाख रुपया प्रतिमाह देने का वादा कर रहे हैं। अपने यहां आयुष चिकित्सकों को तो आप 30-35 हज़ार रुपया महीना देते हैं और यहां तीन लाख रुपए देने का वादा कर रहे। उन्होंने कहा कि जब आपको अपने विभाग के बारे में जानकारी है ही नहीं तो आप कुछ भी क्यों बोलते हैं?

बता दें कि इरफान अंसारी ने कहा कि गरीब होना या अल्पसंख्यक होना कोई अपराध नहीं है। गरीब अल्पसंख्यक परिवार अपने बच्चों को बड़ी उम्मीदों के साथ पढ़ाते हैं और ऐसे मौके पर इस तरह का व्यवहार बेहद शर्मनाक है। उन्होंने इसे निंदनीय करार देते हुए कहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री ने एक बच्ची का अपमान किया है। डॉ. इरफान अंसारी ने यह भी ऐलान किया कि झारखंड सरकार नुसरत परवीन को खुला ऑफर दे रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों नुसरत को नियुक्ति पत्र सौंपा जाएगा।

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