
महेश सिन्हा

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव में महिलाओं को अपने पक्ष में करने के लिए होड़ मची हुई है। सभी पार्टियां महिला मतदाताओं को साधने में जुटी हुई है। इसके लिए नकद राशि से लेकर कई अन्य घोषणाएं की जा रही हैं।

इसकी वजह यह है कि बिहार की सियासत में अब महिलाओं की भूमिका निर्णायक होती जा रही है। आधी आबादी के वोट की ताकत को समझते हुए नीतीश सरकार ने महिलाओं के लिए योजनाओं की झड़ी लगा दी है।
नीतीश सरकार सत्ता बरकरार रखने के लिए रोजगार, उद्यमिता, भत्ता, पेंशन से लेकर आरक्षण देने की घोषणा कर रही है। वहीं दूसरी ओर विपक्ष भी महिलाओं को लुभाने के लिए बड़े वादे कर रहा है। बिहार की इस चुनावी रण में महिलाएं सिर्फ मतदाता नहीं, बल्कि किंगमेकर बनकर उभर रही हैं।
माना जा रहा है कि बिहार के सियासी के अखाड़े में इस बार आधी आबादी पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर होकर उतर रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि बिहार में पिछले एक साल में करीब 15 लाख नई महिला मतदाता जुड़ी हैं। यह सिर्फ संख्या का बढ़ना नहीं है, बल्कि चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित करने वाला कारक है। दरअसल, महिलाएं न सिर्फ चुनावों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं, बल्कि इन्हें ‘साइलेंट वोटर’ भी माना जाता है। कहा जाता है कि महिलाएं चुपचाप जातियों और समुदायों से परे अपनी पंसद के नेता को वोट देती हैं।
इस कारण जातिगत समीकरणों के अलावा महिला मतदाताओं पर सभी पार्टियों की नजर है। बीते चुनावों में महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान की थी और अब यह रुझान और तेज हो चुका है। यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव तक बिहार में कुल महिला मतदाताओं की संख्या 3 करोड़ 57 लाख 71 हजार 306 थी।
विधानसभा चुनाव 2025 आते-आते यह आंकड़ा बढ़कर 3 करोड़ 72 लाख 57 हजार 477 हो गया है। यानी एक साल में 14 लाख 86 हजार से ज्यादा नई महिलाएं मतदाता सूची में जुड़ी हैं। विशेष रूप से मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण, वैशाली और सीतामढ़ी जैसे जिलों में महिला मतदाताओं का उभार और भी चौंकाने वाला है। इन जगहों पर 50 हजार से अधिक नई महिला मतदाता जुडी हैं। इन जिलों में चुनावी समीकरण बदलना अब महिला मतदाताओं की सक्रियता पर ही निर्भर करेगा।
बता दें कि बिहार में कुल 7.64 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 3 करोड़ 72 लाख 57 हजार 477 करोड़ महिलाएं हैं। यहां महिला मतदाताओं की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि पिछले कुछ चुनावों में महिलाएं बढ़-चढ़कर मतदान कर रही हैं।
2020 के विधानसभा चुनावों में 243 में 167 सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा वोट डाले थे। 2015 में तो 202 सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी महिला मतदान पुरुषों से 3 प्रतिशत ज्यादा था। चुनाव आयोग के अनुसार राज्य में पुरुष मतदाताओं की संख्या 4 करोड़ है। इस बार विधानसभा चुनाव में 9.26 लाख मतदाता पहली बार मतदान करेगे।
वहीं, राज्य के 20 से 29 साल के युवा मतदाताओं की संख्या 1.6 करोड़ बताई गई है। आयोग के अनुसार बिहार में 21,680 मतदाता 100 साल से अधिक उम्र के हैं। राज्य में कुल वरिष्ठ मतदाताओं की संख्या 14.5 लाख है। इसके अलावा राज्य में 6.3 लाख दिव्यांग मतदाता भी हैं।


