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अमित शाह ने भाजपा नेताओं को दिया जीत का मंत्र

by Dayanand Roy

महिला, मोदी और मंदिर के ट्रिपल एम फार्मूले पर चुनाव लड़ेगी भाजपा

महेश सिन्हा

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बिहार के  चुनाव प्रभारी बनाए गए केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बीते दिन चुनाव तैयारियों की समीक्षा की और प्रदेश के नेताओं को जीत  के मंत्र के साथ  आवश्यक निर्देश दिए।

अमित शाह ने शुक्रवार को पहले बेतिया में फिर पटना के भाजपा कार्यालय में पार्टी के शीर्ष नेता और संगठन से जुड़े  पदाधिकारियों के साथ बैठक की।शनिवार को वे समस्तीपुर और अररिया में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

इन बैठकों को चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों के चयन से जोड़कर देखा जा रहा है। अमित शाह के इस दो दिवसीय दौरे को इसलिए भी अहम माना जा रहा है ,क्योंकि चुनाव से पहले पार्टी अपनी रणनीति को मजबूत करने और पिछली कमियों को दूर करने पर जोर दे रही है।  उन्होंने शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय में पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए ‘ट्रिपल एम’ का फॉर्मूला दिया।

ट्रिपल एम यानी महिला, मोदी और मंदिर। उन्होंने कहा कि महिला परिवार की धुरी होती हैं, इसलिए प्रत्येक कार्यकर्ता को हर महिला तक पहुंचना होगा और एनडीए सरकार की योजनाओं की जानकारी देनी होगी। अमित शाह ने कहा कि चुनाव में बीजेपी और एनडीए का लक्ष्य 225 सीटों पर जीत हासिल करना है। इसके लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 225 बार जनसंपर्क अभियान चलाना होगा।

उन्होंने नेताओं से कहा कि जाति, धर्म और विचारधारा की सीमाओं से ऊपर उठकर केवल जनता से संवाद करें और उन्हें विश्वास दिलाएं कि एनडीए ही विकास और स्थिरता की गारंटी है। राजनीति के जानकारों की मानें तो भाजपा की बैठकों का मकसद साफ है ,चुनावी तैयारी को धार देना और उन इलाकों पर ध्यान देना जहां पार्टी पिछली बार कमजोर साबित हुई थी।

पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठकों में मुख्य रूप से उन सीटों पर मंथन हो रहा है, जहां भाजपा दूसरी पोजीशन पर रही थी। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के नतीजों पर नजर डालें तो भाजपा कई जगह मजबूत प्रदर्शन करने के बावजूद जीत से दूर रह गई।

आंकड़ों के मुताबिक, कुल 243 विधानसभा सीटों में से लगभग 68 सीटों पर भाजपा दूसरे स्थान पर रही।इनमें सबसे ज्यादा सीटें सीमांचल इलाके में थीं, जिसमें अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिले शामिल हैं। यह इलाका लंबे समय से महागठबंधन, खासकर आरजेडी और कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। यहां भाजपा ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन जीत नहीं हासिल कर सकी। भाजपा की कई हार बहुत ही छोटे अंतर से हुई।

पार्टी लगभग 5 सीटों पर 500 वोट से भी कम अंतर से हारी। जबकि 11 सीटों पर हार का अंतर 1000 वोट से कम रहा। इसके साथ ही करीब 40 से 45 सीटें ऐसी थीं जहां भाजपा 5000 वोट से भी कम अंतर से हारी। इन करीबी हारों में नालंदा, गोपालगंज, भोजपुर, आरा, भागलपुर और पूर्णिया जैसे इलाके शामिल थे। कुछ प्रमुख सीटें जैसे हिलसा (नालंदा), बरबीघा (शेखपुरा), भोरे (गोपालगंज) और बछवाड़ा (बेगूसराय) में हार का अंतर 1000 वोट से भी कम था।

अमित शाह ने शनिवार को समस्तीपुर जिले के सरायरंजन स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज में उत्तर-मध्य बिहार के आठ जिलों- समस्तीपुर, मधुबनी, झंझारपुर, बेगूसराय, खगड़िया सहित अन्य क्षेत्रों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की।

स्थानीय भाजपा नेताओं ने बताया कि इस बैठक में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रत्याशियों के नामों पर भी चर्चा हुई। वहीं, अररिया में अमित शाह ने कोसी-सीमांचल और अंग प्रदेश के दस जिलों की भाजपा कोर कमेटी के साथ बैठक की। इस बैठक में 49 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक में चुनावी रणनीति और संगठन की मजबूती पर चर्चा हुई।

अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित कर उन्हें ‘225 सीट मिशन’ के लिए प्रेरित किया। इससे पहले शुक्रवार को शाह ने पश्चिम चंपारण और सारण के करीब 350 नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की।

बेतिया स्थित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज के कॉन्फ्रेंस हॉल में हुई बैठक में उन्होंने साफ संदेश दिया कि “कौन क्या है, यह भूल जाइए, चुनाव को एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह लड़िए। प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने बताया कि स्क्रीनिंग के बाद उम्मीदवारों की लिस्ट अमित शाह को सौंप दी गई है। अब अंतिम निर्णय केन्द्रीय नेतृत्व  लेगा।

जानकारों के अनुसार अमित शाह की बैठकों में यह तय किया जा रहा है कि एंटी-इनकंबेंसी झेल रहे विधायकों के क्षेत्रों में लोगों को कैसे शांत किया जाए और नए मुद्दों के जरिए माहौल अपने पक्ष में कैसे बनाया जाए। साथ ही एनडीए के सहयोगी दलों के साथ तालमेल को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। पार्टी चाहती है कि गठबंधन में किसी तरह की खटपट न दिखे और सभी दल मिलकर चुनाव लड़ें।

अमित शाह ने नेताओं को चुनावी जीत का मंत्र देते हुए कहा कि कौन क्या है, यह भूल जाइए। इस चुनाव में केवल एनडीए की जीत को प्राथमिकता दीजिए। उन्होंने कहा कि यह चुनाव न सिर्फ बिहार, बल्कि देश के अन्य हिस्सों के लिए भी संदेशवाहक साबित होगा। ऐसे में बिना भेदभाव और व्यक्तिगत पसंद-नापसंद से ऊपर उठकर हर कार्यकर्ता को पूरी ताकत से जुट जाना चाहिए।

अमित शाह ने नेताओं को साफ संदेश दिया कि यह देखना जरूरी नहीं कि कौन उम्मीदवार है, बल्कि यह देखना है कि एनडीए चुनाव लड़ रहा है और हर हाल में एनडीए को जीत दिलानी है। उन्होंने यह भी कहा कि अब से लेकर चुनाव तक बाकी सारे काम छोड़कर संगठन को पूरा समय दें

बैठक में अमित शाह, धर्मेन्द्र प्रधान, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी एल संतोष, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, बिहार प्रभारी विनोद तावड़े, सह प्रभारी दीपक प्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया मौजूद थे।

लेखक न्यूजवाणी बिहार के संपादक हैं।

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