ओडिशा में छात्रा की मौत के मामले में आहूत बंद का आंशिक असर

Dayanand Roy
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भुवनेश्वर: ओडिशा में एक कॉलेज की छात्रा की मौत की घटना के विरोध में विपक्षी दल कांग्रेस और सात अन्य राजनीतिक दलों की ओर से आहूत 12 घंटे के बंद के दौरान बृहस्पतिवार को सामान्य जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित रहा।

छात्रा ने कथित यौन उत्पीड़न की घटना में न्याय न मिलने पर खुद को आग लगा ली थी।

भुवनेश्वर, कटक और राज्य के अन्य हिस्सों में सड़कें सुनसान रहीं, कुछ वाहनों की आवाजाही देखी गई और जटनी, पुरी व भद्रक स्टेशन जैसे कुछ स्थानों पर रेल सेवाएं प्रभावित हुईं। विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने बंद के समर्थन में सुबह छह बजे से ही प्रदर्शन शुरू कर दिया था।

इस दौरान बाजार, स्कूल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। हालांकि आवश्यक सेवाओं के लिए आवाजाही में छूट दी गई है।

प्रदर्शनकारियों ने राज्य की राजधानी में कई मुख्य सड़कों पर नाकाबंदी की, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के खिलाफ नारे लगाए और छात्रा के लिए न्याय की मांग की।

कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, माकपा (मार्क्सवादी-लेनिनवादी), फॉरवर्ड ब्लॉक, राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी और राकांपा के नेता बंद को सफल बनाने के लिए अपनी-अपनी पार्टी के झंडे लेकर सड़कों पर उतरे।

कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता रामचंद्र कदम ने कहा, ‘‘ हम लोगों से बंद का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं क्योंकि ओडिशा में भाजपा की सरकार बनने के बाद से महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। राज्य में हर दिन कम से कम 15 महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार होता है और सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने में पूरी तरह विफल रही है।’’

विपक्षी दलों ने बाजारों, परिवहन सेवाओं, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालयों और बैंकों के अधिकारियों से बंद का समर्थन करने का अनुरोध किया है।

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