रेल हादसे में मुआवजे पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रेलवे को ₹8 लाख मुआवजा देने का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने रेल हादसे में मृत यात्री अशोक मेहतो के परिवार को राहत देते हुए पूर्व रेलवे को ₹8 लाख मुआवजा और 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया।

Dayanand Roy
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Jharkhand High Court : झारखंड हाईकोर्ट ने रेल हादसे में जान गंवाने वाले यात्री अशोक मेहतो के परिवार को बड़ी राहत देते हुए पूर्व रेलवे को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि 1 अगस्त 2017 से भुगतान की तिथि तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी परिजनों को दिया जाए। यह राशि दो महीने के भीतर अदा करने का आदेश दिया गया है।

ट्रिब्यूनल ने पहले खारिज कर दिया था दावा

मामला देवघर जिले के मधुपुर निवासी अशोक मेहतो की मौत से जुड़ा है। उनकी पत्नी राजकुमारी देवी और चार बेटियों ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल में मुआवजे की मांग की थी। हालांकि, वर्ष 2023 में ट्रिब्यूनल ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया था कि मामला रेलवे अधिनियम के तहत ‘अनटुवर्ड इंसीडेंट’ की श्रेणी में नहीं आता। इसके बाद परिजनों ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की।

वैध टिकट के साथ कर रहे थे यात्रा

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 1 अगस्त 2017 को अशोक मेहतो ने जमुई से मधुपुर तक का वैध द्वितीय श्रेणी का टिकट लेकर दानापुर-टाटानगर एक्सप्रेस में यात्रा की थी। घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की, जिसके बाद उनका शव नवापटरी के पास मिला। पुलिस जांच और जीआरपी रिकॉर्ड में भी मौत का कारण चलती ट्रेन से गिरना बताया गया था। मृतक के पास से वैध रेल टिकट भी बरामद हुआ था।

हाईकोर्ट ने रेलवे की दलील खारिज की

रेलवे की ओर से कहा गया था कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और शव रेलवे ट्रैक से कुछ दूरी पर मिला था। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि तेज रफ्तार ट्रेन से गिरने पर शव ट्रैक से दूर जाकर भी मिल सकता है। केवल इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि मौत ट्रेन से गिरने से नहीं हुई।

दो महीने में भुगतान का निर्देश

जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने मामले को रेलवे अधिनियम के तहत ‘अनटुवर्ड इंसीडेंट’ माना और रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने पूर्व रेलवे को निर्देश दिया कि मृतक के आश्रितों को 8 लाख रुपये मुआवजा और 1 अगस्त 2017 से भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दो महीने के भीतर दिया जाए।

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